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खेत की बाउंड्री पर सागवान, बीच में मौसमी की बागवानी, खेती का...


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खेत की बाउंड्री पर सागवान, बीच में मौसमी, खेती का यह मॉडल कर देगा मालामाल

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पलामू के किसान सतीश दुबे ने चार एकड़ में शानदार खेती का मॉडल बनाया है. उन्होंने बाउंड्री पर सागवान और खेत के अंदर 800 मौसमी के पौधे लगाए हैं. इस मॉडल में 3-4 लाख रुपये की लागत आई है. मौसमी से हर साल 12-15 लाख रुपये और सागवान से भविष्य में बंपर मुनाफा होगा.

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पलामूः आज के बदलते दौर में किसान अब खेती को सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि बेहतर आमदनी का जरिया बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इसी सोच के साथ पलामू जिले के बसना गांव निवासी सतीश दुबे अपने चार एकड़ खेत को व्यवसायिक खेती के मॉडल के रूप में विकसित कर रहे हैं. उनके खेत में सागवान, फलदार पौधे, सब्जी और इंटीग्रेटेड खेती को एक साथ जोड़ने की तैयारी है.

बाउंड्री के चारों तरफ सागवान के पौधे
पलामू जिले के बसना गांव निवासी सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ खेत की बाउंड्री के चारों तरफ दो कतारों में सागवान के पौधे लगाए हैं. पौधों के बीच करीब 10 फीट की दूरी रखी गई है. खास बात यह है कि सागवान के पौधे टिशू कल्चर तकनीक से तैयार किए गए हैं, जिन्हें वह नागपुर की टिशू कल्चर नर्सरी से लेकर आए हैं. सागवान को भविष्य के निवेश के तौर पर तैयार किया जा रहा है. करीब 15 से 20 साल में इसके पेड़ तैयार होने की उम्मीद है, जिसके बाद बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलने की संभावना है.

उन्होंने कहा कि खेत के अंदर करीब 800 मौसमी के पौधे लगाए गए हैं. कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौसमी के बाग के लिए पलामू की जलवायु को उपयुक्त पाया. उन्होंने मौसमी की नटाल किस्म का चयन किया है, जिसे खास प्रभेद माना जाता है. भविष्य में मौसमी के बाद नींबू का बाग लगाने की भी योजना है.

कितनी लागत और कितनी आमदनी?
आगे कहा कि इस पूरे मॉडल को तैयार करने में अब तक करीब तीन से चार लाख रुपये की लागत आई है. इसके अलावा हर साल पौधों की देखरेख और खेत के रखरखाव पर खर्च होगा. उनका अनुमान है कि उत्पादन शुरू होने के बाद एक एकड़ मौसमी से करीब तीन लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है. इस हिसाब से चार एकड़ से मौसमी के जरिए 12 से 15 लाख रुपये तक का कारोबार होने की उम्मीद है. इसके अलावा सागवान, नींबू, सब्जी और अन्य खेती से अलग आमदनी होगी.

आगे बताया कि बचपन से ही पेड़-पौधों और खेती के प्रति उनका लगाव रहा है. इसी लगाव को अब व्यवसाय से जोड़कर वह ऐसा मॉडल तैयार करना चाहते हैं, जिसमें एक ही खेत से अलग-अलग स्रोतों से आमदनी हो और भविष्य में इसे बड़े कृषि व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सके.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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