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30 लाख रुपए के इनामी टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ भोला सिंह भोक्ता के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद अब उसकी पत्नी ने इस उग्रवादी संगठन की कमान संभाल ली है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी ने यह खुलासा किया है। एटीएस और पुलिस से बचने और लेवी वसूलने के लिए संगठन के लोग जंगी और सेशन जैसे एप का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच एजेंसी के इस खुलासे के बाद झारखंड और यूपी एटीएस से गंझू के परिजनों और सिंडिकेट के लोगों की धरपकड़ के लिए व्यापक अभियान छेड़ दिया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक वर्ष 2023 में आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत जंगी एप को राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था। कानून के मुताबिक इस एप का इस्तेमाल करने वालों को सात साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है। एटीएस अब झारखंड में सक्रिय उन सभी मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और विशिष्ट आईडी की तकनीकी पड़ताल कर रही है, जो इस एप के जरिए गंझू के परिवार और टीएसपीसी के लोगों से संवाद कर रहे हैं। गंझू ने कई रिश्तेदारों को दिलाई है सीसीएल में नौकरी
एटीएस की जांच में पता चला है कि बृजेश गंझू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कई रिश्तेदारों और परिजनों को सीसीएल में नौकरी दिलाई है। हाल यह है कि वे लोग कभी ड्यूटी करने नहीं जाते, लेकिन सीसीएल से नियमित तौर पर उनके खाते में वेतन का भुगतान किया जा रहा है। एटीएस अब सीसीएल के उन कार्यालयों की भी गोपनीय सूची तैयार कर रही है, जहां ड्यूटी पर गए बिना इन लोगों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जांच एजेंसी अब इस सिंडिकेट से मिलीभगत करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को भी नामजद कर सकती है। दोनों राज्यों की एटीएस को अब मध्यस्थ ‘अग्रवाल’ की तलाश
जांच में यह भी सामने आया है कि कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों और विकास योजनाओं से वसूली गई करोड़ों रुपए की लेवी का बड़ा हिस्सा गंझू के परिजनों और करीबियों में बांटा गया है। यह काली कमाई कहां-कहां खपाई गई, किन संपत्तियों, जमीनों और व्यापारिक उपक्रमों में निवेश की गई, इसकी भी सख्ती से जांच की जा रही है। इसी कड़ी में दोनों राज्यों की एटीएस को ‘अग्रवाल’ नाम के एक बड़े मध्यस्थ (फाइनेंशियल कड़ी) की तलाश है। सूत्रों के मुताबिक, यही व्यक्ति बृजेश गंझू और उसकी पत्नी तक लेवी का पैसा सुरक्षित पहुंचाने और उसे ठिकाने लगाने का मुख्य काम करता था। इस कड़ी के हाथ लगते ही लेवी के सिंडिकेट से जुड़े कई सफेदपोशों के बेनकाब होने की संभावना है।
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