भास्कर न्यूज | गिरिडीह गिरिडीह-कोडरमा रेलवे लाइन पर सलैया और न्यू गिरिडीह रेलवे स्टेशन के बीच बने दो रेलवे अंडरपास लगातार बारिश के कारण राहगीरों के लिए गंभीर मुसीबत बन गए हैं। अंडरपास की तकनीकी बनावट में गंभीर खामी है । ये आसपास के भू-भाग से निचले हिस्से में बने हैं। जमीन के ढलान की वजह से आसपास का पूरा बारिश का पानी मिट्टी और बालू के साथ सीधे अंडरपास में बहकर जमा हो रहा है। ड्रेनेज यानी जलनिकासी की कोई व्यवस्था न होने से पानी कई दिनों तक अटका रहता है और भारी कीचड़ जमा हो जाता है। इस अव्यवस्था के कारण शंकरचक, हरिचक, वनखंजो, परसाटांड़ और सिहोडीह सहित आसपास के दर्जनों गांवों की करीब 20 हजार आबादी का संपर्क गिरिडीह शहर व प्रखंड मुख्यालय से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बरसात के चार महीने यहां आवागमन नारकीय बना रहता है। पानी की गहराई का अंदाजा न लगने से बाइक चालकों के फिसलने और इंजन बंद होने का डर रहता है, जबकि कार और ट्रैक्टर चालकों को रेंगते हुए गुजरना पड़ता है। पैदल चलने वालों ने तो इस रास्ते से आना-जाना ही बंद कर दिया है। केस स्टडी-1: शंकरचक-सिहोडीह अंडरपास; प्रखंड कार्यालय जाने का मुख्य रास्ता डूबा पचंबा, बोड़ो, भंडारीडीह और लखारी इलाके के लोगों के लिए शंकरचक और सिहोडीह के बीच बना रेलवे अंडरपास गिरिडीह प्रखंड कार्यालय आने-जाने का मुख्य मार्ग है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग बाइक, कार और छोटे मालवाहक वाहनों से यहां पहुंचते हैं। अंडरपास में गहरा पानी जमा होने से कई बाइक सवार दुर्घटना के डर से बीच रास्ते से ही लौटकर लंबा चक्कर काट रहे हैं, वहीं स्थानीय लोग किनारे से जान जोखिम में डालकर किसी तरह वाहन निकाल रहे हैं।
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