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गुरु पूर्णिमा के दिन बुधवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अहले सुबह से भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने कतार में लगकर बाबा का जलाभिषेक किया। आज अंतिम स्पर्श पूजा गुरुवार से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। ऐसे में बाबा बैद्यनाथ का स्पर्श पूजा एक माह तक के लिए आज रात 12 बजे से बंद हो जाएगा। बैद्यनाथ मंदिर में अरघा सिस्टम लागू हो जाएगा। इधर, आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों और स्थानीय क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु बाबा मंदिर में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और स्पर्श दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु अरघा के माध्यम से ही जलार्पण कर सकेंगे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का एक मुख्य कारण यह भी है कि बुधवार को स्पर्श पूजा का अंतिम दिन है। 30 जुलाई से श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही मंदिर में अरघा व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद पूरे सावन माह में श्रद्धालु अरघा के माध्यम से ही जलार्पण कर सकेंगे और स्पर्श पूजा स्थगित रहेगी। आज भगवान शिव और गुरु दोनों की कृपा प्राप्त होती है मंदिर के पंडा-पुजारियों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से भगवान शिव और गुरु दोनों की कृपा प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते मंदिर में देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और श्रद्धालुओं की अन्य सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। कल से शुरू होने वाले श्रावणी मेले में लाखों कांवरियों के आगमन के साथ बाबा नगरी पूरी तरह शिवमय हो जाएगी। वहीं, गुरु पूर्णिमा के मौके पर झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका सिंह पांडे ने भी बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने यह भी बताया कि कल से सावन माह और विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू हो रहा है, जिसके लिए सरकार और जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
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