भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

चिकन पॉक्स जैसी बीमारियां दूर भगाती हैं मां पहाड़ी! जानें झारखंड के...


होमताजा खबरधर्म

चिकन पॉक्स दूर भगाती हैं मां पहाड़ी! जानें झारखंड की इस अनोखी पूजा की मान्यता

Last Updated:

झारखंड में पांच दिनों तक मां पहाड़ी की पारंपरिक पूजा की जाती है. वे प्रकृति और गांव की रक्षक देवी मानी जाती हैं. मान्यता है कि इस पूजा से सुख-समृद्धि आती है और बीमारियां दूर होती हैं. पांच दिनों तक लगातार भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. यह पर्व आपसी भाईचारे और लोक संस्कृति का प्रतीक है.

ख़बरें फटाफट

जमशेदपुरः झारखंड को प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर राज्य माना जाता है. चारों ओर फैले घने जंगल, पहाड़, नदियां और हरियाली इसकी पहचान हैं. यही कारण है कि यहां की संस्कृति और परंपराएं भी प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं. झारखंड के विभिन्न ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी प्रकृति की शक्तियों की पूजा की जाती है. इन्हीं परंपराओं में एक महत्वपूर्ण और आस्था से जुड़ा पर्व है मां पहाड़ी पूजा, जिसे लोग श्रद्धा, विश्वास और उत्साह के साथ मनाते हैं.

मां पहाड़ी को गांव, समाज और प्रकृति की रक्षक देवी माना जाता है. लोगों की मान्यता है कि मां पहाड़ी अपने भक्तों की हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान करती हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इस पूजा के माध्यम से लोग प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा भी प्रकट करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं.

पूरे विधि-विधान से होती पूजा
मां पहाड़ी पूजा के बारे में जानकारी देते हुए पूजा के कर्ता दुर्गा राव बताते हैं कि यह पूजा हर वर्ष पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की जाती है. पूजा लगभग पांच दिनों तक चलती है. इस दौरान मां पहाड़ी की प्रतिमा या प्रतीक स्वरूप पत्थर को विशेष सम्मान के साथ लाया जाता है. इसके बाद हल्दी मिले जल और नीम के पत्तों से मां का स्नान कराया जाता है. उनके चरणों को धोया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां पहाड़ी की पूजा करने से गांव और मोहल्ले में सुख-शांति बनी रहती है. साथ ही चिकन पॉक्स जैसी बीमारियों से भी लोगों की रक्षा होती है. बुजुर्गों का कहना है कि माता की कृपा से कई प्रकार की बीमारियां और संकट दूर हो जाते हैं. यही वजह है कि लोग मां पहाड़ी को अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी देवी के रूप में पूजते हैं.

लगातार 5 दिनों तक भंडारे
पूजा के दौरान पूरे गांव और बस्ती का माहौल किसी बड़े पर्व से कम नहीं होता. पांच दिनों तक लगातार भंडारे और सामूहिक भोजन का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. दिन-रात गीत-संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और सांस्कृतिक नृत्यों की प्रस्तुति होती है. इससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बन जाता है और लोगों के बीच भाईचारा तथा सामाजिक एकता मजबूत होती है.

पूजा के अंतिम दिन श्रद्धालु पूरे सम्मान और भावनाओं के साथ मां पहाड़ी की विदाई करते हैं. इस दौरान लोग अगले वर्ष फिर से माता के आगमन की कामना करते हैं. मां पहाड़ी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, प्रकृति प्रेम और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top