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छत की ढलाई करा रहे हैं तो न करें ये गलतियां, NIT...


जमशेदपुर. अगर आप अपना घर बनवा रहे हैं तो यह खबर आपके काम की हो सकती है. घर बनवाते समय छत की ढलाई यानी आरसीसी स्लैब का काम सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होता है. इस दौरान छोटी सी लापरवाही आगे चलकर दरार, सीलन, कमजोर कंक्रीट और दूसरे निर्माण संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है. एनआईटी जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अवधेश चौधरी के अनुसार, छत की ढलाई के समय केवल सीमेंट का ब्रांड देखकर गुणवत्ता तय नहीं करनी चाहिए, बल्कि पूरे कंक्रीट निर्माण की प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है.

सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी का सही अनुपात जरूरी
प्रोफेसर अवधेश चौधरी बताते हैं कि कंक्रीट में सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी का अनुपात बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसे केवल अंदाजे से तय नहीं करना चाहिए. आरसीसी स्लैब के लिए जरूरी कंक्रीट ग्रेड और मिश्रण के अनुसार मात्रा निर्धारित की जानी चाहिए. उदाहरण के तौर पर एम20 के पारंपरिक मिश्रण में सीमेंट : बालू : गिट्टी का अनुपात 1:1.5:3 बताया जाता है, लेकिन वास्तविक निर्माण में इंजीनियर द्वारा तैयार किए गए मिश्रण को प्राथमिकता देना बेहतर है. पानी जरूरत से ज्यादा डालना भी नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे कंक्रीट की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है.

कंपन की प्रक्रिया भी जरूरी
ढलाई के दौरान कंक्रीट की अच्छी तरह भराई यानी कंपन प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. कंक्रीट डालने के बाद कंपन मशीन का सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है, ताकि उसके अंदर मौजूद हवा के खाली स्थान निकल सकें और कंक्रीट अच्छी तरह सरिया तथा शटरिंग के आसपास बैठ सके. हालांकि जरूरत से ज्यादा कंपन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कंक्रीट में अलगाव हो सकता है. इसलिए प्रशिक्षित व्यक्ति से ही कंपन का काम कराया जाना चाहिए.

केवल दुकानदार की सलाह या ब्रांड के नाम पर न करें भरोसा
सीमेंट खरीदते समय सिर्फ दुकानदार की सलाह या किसी एक ब्रांड के नाम पर भरोसा करना सही तरीका नहीं है. सीमेंट की निर्माण तिथि, पैकेजिंग, आईएस मानक और भंडारण की स्थिति जरूर देखनी चाहिए. लंबे समय तक नमी वाली जगह पर रखा हुआ सीमेंट अपनी गुणवत्ता खो सकता है. जरूरत पड़ने पर सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की प्रयोगशाला जांच भी कराई जा सकती है. बीआईएस के तहत आईएस 456 के अनुसार कंक्रीट, निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पानी, गिट्टी और उसकी दबाव सहने की क्षमता जैसी चीजों की जांच के प्रावधान उपलब्ध हैं.

बालू और मिट्टी की गुणवत्ता भी जरूरी
इसी तरह बालू और गिट्टी की गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण है. बालू में मिट्टी या अन्य गंदगी अधिक नहीं होनी चाहिए और गिट्टी का आकार तथा श्रेणी काम के अनुसार होना चाहिए. पानी भी साफ और निर्माण के लिए उपयुक्त होना चाहिए. कंक्रीट की गुणवत्ता केवल सामग्री से नहीं, बल्कि सामग्री की सही मात्रा तय करने, मिलाने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने, डालने, अच्छी तरह बैठाने और पानी देकर रखने जैसे हर चरण से तय होती है.

क्योरिंग का ध्यान रखें
अंत में सबसे जरूरी है क्योरिंग यानी ढलाई के बाद कंक्रीट को पानी देकर नम रखना. ढलाई के बाद कंक्रीट को पर्याप्त नमी और सही तरीके से पानी देना जरूरी है, ताकि सीमेंट के साथ पानी की रासायनिक प्रक्रिया ठीक से हो और कंक्रीट अपनी निर्धारित मजबूती विकसित कर सके. इसलिए घर बनाने वाले लोगों को केवल सीमेंट के ब्रांड या कीमत पर ध्यान देने के बजाय संरचनात्मक इंजीनियर की सलाह, सही मिश्रण, सामग्री की जांच, उचित कंपन और क्योरिंग पर बराबर ध्यान देना चाहिए. यही सावधानियां घर की छत को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.



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