Last Updated:
Palamu Tiger Reserve Youth Employment: पलामू टाइगर रिजर्व में जंगल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है. ‘हुनर से रोजगार’ कार्यक्रम के तहत अब तक 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को नेचुरलिस्ट, कंप्यूटर, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन और सिलाई जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है. युवाओं को ईको-गाइड बनाकर पर्यटन से भी जोड़ा जा रहा है. इसके अलावा महुआ और अन्य वन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और पलायन कम करने में मदद मिलेगी.
पलामू: झारखंड जंगल और पहाड़ों से घिरा राज्य है. यहां एक से बढ़कर एक प्राकृतिक धरोहर मौजूद हैं. यहां के जंगल सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं हैं. जंगल में रहने वाले लोगों की जिंदगी भी इनसे जुड़ी हुई है. उनकी आजीविका का बड़ा हिस्सा जंगल पर निर्भर है. इसी सोच के साथ पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) अब जंगल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी तैयार कर रहा है. कभी जंगल पर निर्भर रहने वाले परिवारों के युवा अब अपने हुनर के दम पर रोजगार की ओर बढ़ रहे हैं. युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे उन्हें अपने ही इलाके में रोजगार के अवसर मिल सकें. पीटीआर में जन-वन भागीदारी और स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तस्वीर लगातार सामने आ रही है. रोजगार और संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में कई स्तर पर काम किया जा रहा है.
600 से अधिक युवाओं को मिला हुनर
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि ‘हुनर से रोजगार’ कार्यक्रम के तहत अब तक 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को अलग-अलग रोजगारपरक कौशल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इन युवाओं को नेचुरलिस्ट, कंप्यूटर, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन और सिलाई सहित कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाना है. अधिकारियों का मानना है कि जंगल और उसके आसपास रहने वाले युवाओं को अगर उनके क्षेत्र में ही रोजगार मिलेगा, तो उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा. साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
पर्यटकों को गाइड करेंगे स्थानीय युवा
पीटीआर में ईको-टूरिज्म को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. प्रशिक्षण प्राप्त जनजातीय युवा अब ईको-गाइड के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं. जब पर्यटक जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक स्थलों को देखने पहुंचेंगे, तो स्थानीय युवा उन्हें इन जगहों की जानकारी देंगे. वे पर्यटकों को क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ जनजातीय संस्कृति और विरासत से भी परिचित कराएंगे. इससे पर्यटकों को स्थानीय अनुभव मिलेगा. वहीं स्थानीय युवाओं को अपने ही इलाके में कमाई का अवसर मिलेगा. इससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
पर्यटन बढ़ेगा तो बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत बेतला और आसपास के पर्यटन स्थलों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ना रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है. सिर्फ गाइड का काम ही रोजगार का जरिया नहीं होगा. स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और दूसरी सेवाओं के जरिए भी ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. पर्यटन बढ़ने से गांवों में छोटे कारोबार के अवसर भी बढ़ेंगे. स्थानीय लोग पर्यटकों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगे. इस तरह जंगल की खूबसूरती देखने आने वाला हर पर्यटक स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे सकता है.
महुआ से लेकर जैविक उत्पाद तक
पीटीआर क्षेत्र में वन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं. ‘महुआ मित्र’ जैसी पहल के जरिए महुआ के संग्रहण और उससे बेहतर मूल्य प्राप्त करने पर जोर दिया जा रहा है. जंगल से मिलने वाले पत्ते, महुआ और दूसरे वन उत्पाद ग्रामीणों की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा हैं. अब इन उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इससे ग्रामीणों को अपनी पारंपरिक उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा. साथ ही जंगल पर आधारित अर्थव्यवस्था को भी नया स्वरूप मिलेगा. स्थानीय उत्पादों की बेहतर बिक्री से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की संभावनाएं तैयार होंगी.
संरक्षण और रोजगार का नया मॉडल
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने कहा कि यह पहल सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य प्रकृति संरक्षण और स्थानीय आजीविका को एक-दूसरे का सहयोगी बनाना भी है. जब स्थानीय युवाओं को जंगल से जुड़े पर्यटन और रोजगार के अवसर मिलेंगे, तो उनका जंगल के प्रति जुड़ाव और मजबूत होगा. वे जंगल को केवल संसाधन के रूप में नहीं देखेंगे. बल्कि इसे अपनी आजीविका का आधार मानकर इसके संरक्षण में भी भागीदार बनेंगे.
बेहतर संतुलन बनाने की मिसाल
इस तरह पलामू टाइगर रिजर्व में जंगल, जनजातीय समाज और रोजगार को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. स्थानीय युवाओं को हुनर देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम जारी है. साथ ही जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है. पीटीआर की यह पहल आने वाले समय में संरक्षण और रोजगार के बीच बेहतर संतुलन बनाने की मिसाल बन सकती है.
About the Author
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
और पढ़ें