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Jamshedpur Vishal Smart Jugaad: जमशेदपुर के विशाल शर्मा ने देसी जुगाड़ से साधारण साइकिल को चलती-फिरती दुकान में बदल दिया है. वे साइकिल से गांव-गांव घूमकर चाकू और औजारों की धार तेज करते हैं और रोजाना 20 किमी का सफर तय कर दो हजार रुपये तक कमा लेते हैं.
जमशेदपुर. कहते हैं कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो वह सीमित संसाधनों में भी अपनी अलग पहचान बना सकता है. इसकी एक मिसाल हैं विशाल शर्मा, जिन्होंने अपने हुनर और देसी जुगाड़ से एक साधारण साइकिल को ही चलती-फिरती दुकान में बदल दिया है. उनकी यह अनोखी साइकिल देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. विशाल इसी साइकिल के सहारे गांव-गांव घूमते हैं और लोगों के घरों तक पहुंचकर चाकू, छुरी समेत रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई धारदार औजारों की धार तेज करते हैं.
खुद की तैयार करवायी खास तरह की साइकिल
Local 18 को जानकारी देते हुए विशाल शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी जरूरत और काम को आसान बनाने के लिए खुद ही साइकिल में वेल्डिंग कराकर एक खास तरह का ढांचा तैयार किया है. उन्होंने साइकिल के पिछले हिस्से में अतिरिक्त पहिए के बगल में एक लोहे की रिंग और जरूरी उपकरणों को लगाने की व्यवस्था बनाई है. इसके साथ ही धार तेज करने के लिए दो खास पत्थर लगाए हैं. इस पूरे इंतजाम की मदद से वह कहीं भी रुककर अपना काम शुरू कर सकते हैं. यानी न उन्हें किसी दुकान की जरूरत है और न ही एक जगह बैठकर ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है.
रोजाना करते हैं 20 किमी का सफर
विशाल बताते हैं कि वह रोजाना अपनी साइकिल से करीब 20 किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं. इस दौरान अलग-अलग गांवों और बस्तियों में जाकर लोगों के चाकू, छुरी और दूसरे धारदार सामानों को तेज करते हैं. गांवों में आज भी ऐसे कारीगरों की काफी जरूरत है, क्योंकि रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू से लेकर खेती और घरेलू कामकाज के औजारों तक को समय-समय पर धार लगाने की जरूरत पड़ती है. ऐसे में विशाल की यह चलती-फिरती दुकान लोगों के लिए काफी सुविधाजनक साबित होती है.
सबसे खास बात यह है कि विशाल इस काम से हर दिन करीब 2,000 रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं. उनकी कमाई इस बात का उदाहरण है कि रोजगार के लिए हमेशा बड़ी पूंजी या किसी बड़ी दुकान की जरूरत नहीं होती. सही हुनर, मेहनत और थोड़ी रचनात्मक सोच से भी अच्छी आमदनी का रास्ता तैयार किया जा सकता है.
परेशानी को अवसर में बदलना
विशाल की इस साइकिल को देखकर यह साफ समझ आता है कि जुगाड़ केवल किसी चीज को जोड़ने का नाम नहीं, बल्कि अपनी परेशानी को अवसर में बदलने की कला भी है. जहां कई लोग रोजगार की तलाश में भटकते हैं, वहीं विशाल ने अपनी मेहनत और दिमाग लगाकर साइकिल को ही अपना रोजगार बना लिया है. हर दिन 20 किलोमीटर का सफर, गांव-गांव जाकर काम करना और अपने हुनर के दम पर परिवार की आजीविका चलाना उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक कहानी है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…