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जेटेट में भाषा के पेपर ने दोनों पालियों में उलझाया:समय से 3...




झारखंड में 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रविवार को जेटेट परीक्षा हुई। रांची के 101 केंद्रों पर करीब 60 हजार अभ्यर्थियों ने दो पालियों में परीक्षा दी। परीक्षा को लेकर युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। राजधानी के कुछ केंद्रों पर परीक्षा शुरू होने से ढाई-तीन घंटे पहले ही परीक्षार्थी पहुंचने लगे थे। उनके साथ आए अभिभावक भी केंद्रों के बाहर डटे रहे। रांची में स्थानीय परीक्षार्थियों के अलावा रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो और खूंटी जिले के अभ्यर्थियों के भी परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। नए पैटर्न, पहली पाली के घुमावदार सवालों और क्षेत्रीय भाषा के कठिन प्रश्नपत्र ने अभ्यर्थियों को खासा छकाया। परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि कुल मिलाकर प्रश्नों का स्तर मॉडरेट से आसान था, लेकिन भाषा के पेपर ने सबसे ज्यादा परेशानी बढ़ाई। बोकारो के अभ्यर्थियों के अनुसार खोरठा भाषा का पेपर काफी भारी रहा और कई प्रश्नों के विकल्पों में वे उलझे रहे। खूंटी के ज्यादातर अभ्यर्थियों ने मुंडारी भाषा चुनी थी, उन्होंने भी पेपर को कठिन बताया। इसमें लेखकों से संबंधित सवाल अधिक पूछे गए थे। वहीं नागपुरी भाषा के अभ्यर्थियों ने स्वीकार किया कि जिसे वे आसान मान रहे थे, उसी भाषा के पेपर ने पसीने छुड़ा दिए। विषयवार स्तर की बात करें तो सोशल स्टडीज के सवाल सामान्य रहे और विज्ञान के प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे। वहीं गणित के सवालों में लंबा कैलकुलेशन होने के कारण अभ्यर्थियों का काफी समय लग गया। परीक्षार्थियों ने बताया कि परीक्षा के अंतिम समय में प्रश्नों की संख्या अधिक महसूस हुई और समय कम पड़ गया, जिसके चलते कई प्रश्नों के उत्तर जल्दबाजी में देने पड़े। परीक्षा का आयोजन दो पालियों में किया गया। पहली पाली में प्राथमिक स्तर और दूसरी पाली में उच्च प्राथमिक स्तर के अभ्यर्थियों ने भाग लिया। लंबे अंतराल के बाद परीक्षा होने से नए प्रारूप और समय प्रबंधन के अनुसार खुद को ढालना कई अभ्यर्थियों के लिए कड़ी चुनौती साबित हुआ। छपरा-थावे एक्सप्रेस सुबह देर से पहुंची, सैकड़ों अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित, हंगामा जेटेट में शामिल होने जा रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों को रेलवे की लेटलतीफी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। छपरा-थावे एक्सप्रेस के चार घंटे से अधिक विलंब से चलने के कारण कई अभ्यर्थी समय पर जमशेदपुर स्थित अपने परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने आसनसोल स्टेशन पर हंगामा किया। कुछ अभ्यर्थी विरोध जताते हुए ट्रेन के इंजन के आगे खड़े हो गए। अभ्यर्थियों के अनुसार, जेटेट की पहली पाली की परीक्षा सुबह नौ बजे से निर्धारित थी। परीक्षार्थियों को सुबह 7:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंचना था। इसके लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने छपरा-थावे एक्सप्रेस से जमशेदपुर आने की योजना बनाई थी। लेकिन ट्रेन आसनसोल स्टेशन पर ही चार घंटे से अधिक देर हो गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि जेटेट की परीक्षा लंबे इंतजार के बाद आयोजित हो रही है। ऐसे में ट्रेन की देरी के कारण परीक्षा में शामिल होने का मौका गंवाना उनके भविष्य के लिए बड़ा झटका है। ट्रेन के समय पर नहीं खुलने से परेशान कुछ अभ्यर्थियों ने इंजन के आगे खड़े होकर विरोध जताया। इस दौरान स्टेशन पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। व्याकरण में परीक्षार्थियों को परेशानी हुई भाषा के प्रश्नों ने परेशानी बढ़ाई : मनीष साहू सवाल बहुत ज्यादा कठिन नहीं थे। जिन छात्रों ने नियमित रूप से पढ़ाई की होगी, उनके लिए पेपर ज्यादा मुश्किल नहीं रहा। हालांकि, भाषा के प्रश्नों ने थोड़ी परेशानी जरूर बढ़ाई। खासकर नागपुरी भाषा में पूछे गए सवालों में लेखकों से संबंधित प्रश्नों की संख्या अधिक थी। भाषा पेपर को हल्के में ले रहे थे लेकिन इसी ने परेशानी बढ़ा दी। 2016 में मामूली अंतर से चूकी थी : रूपम खूंटी से परीक्षा देने पहुंची रूपम कुमारी ने बताया कि साल 2016 में भी परीक्षा दी थी, लेकिन कुछ अंकों के अंतर से चयन नहीं हो पाया था। इस बार पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने आई हूं। फिलहाल सदर प्रखंड में संसाधन शिक्षक के रूप में दिव्यांग बच्चों को पढ़ा रही हैं। सवाल आसान थे भाषा पेपर में परेशानी हुई, प्रश्नों को समझने और उत्तर देने में ज्यादा समय लगा। कंप्यूटर का प्रश्नपत्र आसान रहा : अमन डेनियल कंप्यूटर का प्रश्नपत्र सबसे आसान रहा, जबकि सीडीपी का स्तर औसत था, प्रिंसिपल्स से जुड़े प्रश्न भी पूछे गए थे। हिंदी में कुछ प्रश्न थोड़े उलझाने वाले थे। व्याकरण में परेशानी हो रही थी। वहीं अंग्रेजी में एंटोनिम्स के प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन लगे। सोशल साइंस के प्रश्न ट्रिकी लगे : नैना साहू ओडिशा से परीक्षा देने पहुंचीं नैना साहू ने बताया कि यह उनका पहला प्रयास है। पहली ही बार में परीक्षा काफी अच्छी गई है। प्रश्नों का स्तर भी ठीक था और उन्हें पेपर कठिन नहीं लगा। हालांकि, सोशल साइंस के कुछ प्रश्न थोड़े उलझाने वाले थे। भाषा पेपर में भी परेशानी हुई। खोरठा भाषा का प्रश्नपत्र बांटना भूले पर्यवेक्षक, हंगामे के बाद मिला पेपर बरियातू रोड स्थित सेंट्रल एकेडमी परीक्षा केंद्र पर भुरकुंडा से जेटेट देने पहुंचीं अभ्यर्थी बबीता कुमारी ने बताया कि परीक्षा में पूछे गए सवाल ठीक थे और सभी विषयों के प्रश्नपत्र समय पर मिल गए थे। हालांकि, खोरठा भाषा का प्रश्नपत्र बांटने में लापरवाही हुई। उनके अनुसार, पर्यवेक्षक खोरठा भाषा का प्रश्नपत्र देना भूल गए थे। अभ्यर्थियों के शोर मचाने के बाद प्रश्नपत्र बांटे गए। बबीता ने बताया कि उनकी परीक्षा पहली पाली में थी। वह कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षक पद के लिए परीक्षा में शामिल हुई थीं। पंडरा निवासी संगीता कुमारी पुरुलिया रोड स्थित सेंट अलोइस स्कूल परीक्षा देने पहुंची थीं। 5 माह का बच्चा होने के कारण वह पति व बच्चे के साथ ही पहुंची थीं। केंद्र पर संगीता के पति कभी बच्चे को दुलारते, तो कभी गेट की ओर देखते। मासूम भी मां के लौटने की राह देखता रहा। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के दौरान जिला स्कूल, अपर बाजार समेत शहर के कई परीक्षा केंद्रों पर सूचना में गड़बड़ी देखने को मिली। जिला स्कूल के बाहर चिपकाई गई सूचना में दूसरी पाली की परीक्षा के लिए कक्षा 1 से 5 के स्थान पर कक्षा 6 से 8 लिखा हुआ था। इसे देखकर परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी असमंजस में पड़ गए कि उनका परीक्षा केंद्र यही है या नहीं। काफी देर तक अभ्यर्थी इसी उलझन में रहे। बाद में अधिकारियों ने सूचना में हुई गलती को सुधारा, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हुई। अयोध्या के आंबेडकर नगर से रांची परीक्षा देने पहुंचा बबलू गौंड दृष्टिबाधित हैं। उसने बताया कि परीक्षा की तैयारी यू-ट्यूब पर उपलब्ध अध्ययन सामग्री को सुनकर की है। बबलू ने बताया कि केंद्र पर मौजूद कर्मियों ने काफी सहयोग किया। परीक्षा समाप्त होने तक कर्मी उसके साथ रहे। इसके बाद उसे गाड़ी उपलब्ध कराया, ताकि स्टेशन जा सके। आशीष कुमार यादव और उनकी मां पार्वती देवी धनबाद से परीक्षा देने पहुंची थीं। जिला स्कूल में उनका सेंटर था। आशीष पहली बार जेटेट की परीक्षा दे रहा था, जबकि उनकी मां का यह तीसरा प्रयास था। परीक्षा से पहले आशीष ने मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने भी शुभकामनाएं दीं।



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