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पूछताछ में पांच आरोपियों से मिले इनपुट के बाद भेजा समन
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी मामले में सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते को समन जारी किया है। उन्हें मंगलवार को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह, माकेर्टिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, दो तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान व एबाद से पिछले तीन दिन से पूछताछ कर रही है। तीसरे दिन सोमवार को पूछताछ के दौरान सीआईडी को कुछ इनपुट मिले। इसी के आधार पर ख्यांगते को समन जारी किया गया। अब सीआईडी ख्यांगते से टीडीपीएल को टेंडर आवंटन और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सौंपनी की पूरी प्रक्रिया पर जवाब-तलब करेगी। उनसे पूछा जाएगा कि जब टीडीपीएल को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था तो उसे जेपीएससी जैसी सर्वोच्च चयन संस्था की परीक्षा संचालित करने का टेंडर कैसे दिया गया। परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठज्ञए। निगरानी तंत्र क्या था। ओएमआर शीट में हेराफेरी के बीच वे चुप क्यों रहे। क्या इन गड़बड़ियों को बढ़ावा देने या अनदेखी करने में उनकी कोई भूमिका थी।सीआईडी की टीम इन सभी बिंदुओं पर पूर्व अध्यक्ष से पूछताछ करेगी। इधर, पूछताछ से पहले एल ख्यांगते ने चुप्पी तोड़ी, कहा…
मैं चुनौतियों से भागने वाला नहीं… 40 लाख रु. में सीट बिकने के आरोपों की गहराई से जांच हो
सीआईडी की पूछताछ से ठीक पहले सोमवार को ख्यांगते ने चुप्पी तोड़ी। मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे रूल्स ऑफ प्रोसीजर के तहत लिए थे। जेपीएससी की जिम्मेदारी उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन वे किसी भी चुनौती से भागने वाले इंसान नहीं हैं। उनके पद संभालने से पहले कई पुरानी परीक्षाओं के परिणाम अटके थे। व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत थी। उन्होंने लंबित रिजल्ट का प्रशासन शुरू कराया, परीक्षा आयोजित कराईं। प्रशासनिक सुधार करते हुए शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया को पूरा किया। 40 लाख रुपए में सीट बिकने के आरोपों पर कहा कि ये बातें उनके संज्ञान में भी आई है। अगर इसमें रत्तीभर भी सच्चाई है तो जांच एजेंसी को इसकी तह में जाकर गहराई से जांच करनी चाहिए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाइ हो सके। पीटी या मेन्स रिजल्ट में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं…
रिजल्ट पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर न होने के विवाद पर उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए सफाई दी। उन्होंने कहा कि रूल ऑफ प्रोसीजर-2002 के तहत पीटी या मेन्स के रिजल्ट में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं होते। सिर्फ फाइनल रिजल्ट की प्रोसेसिंग के दौरान तीन सदस्यीय कमेटी स्क्रूटनी करती है। अंत में इसे चेयरमैन अप्रूव करता है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील प्रक्रिया में अकेले फैसला लेना सही नहीं होता। आयोग में सदस्यों के साथ हुई गोपनीय बातचीत के आधार पर ही हस्ताक्षर न कराने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था। एजेंसी के ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी नहीं थी
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के चयन के सवाल पर पूर्व चेयरमैन ने कहा कि आयोग खुद साफ-सुथरी एजेंसी को ही काम देना चाहता है। ब्लैकलिस्टेड एजेंसी से बचता है। जिस समय एजेंसी का चयन हुआ था, उसके ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी आयोग को नहीं थी। यह कोई प्रशासनिक चूक थी या एजेंसी बाद में ब्लैकलिस्ट हुई, यह सीआईडी की जांच का विषय है। छह माह पहले मिली शिकायतों पर ध्यान न देने के आरोप पर उन्होंने कहा कि ईमेल पर रोजाना दर्जनों शिकायतें आती हैं। वे प्लीज लुक इनटू दिस लिखकर आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी को भेज देते थे। वहीं, सीआईडी जांच के तरीके पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों और सीबीआई जांच की मांग पर उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे सीआईडी की जांच का पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि रिमांड पर लिए गए आरोपियों और फाइलों की छानबीन से जांच एजेंसी जल्द ही सारा सच सामने ले आएगी।
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