![]()
रांची में बाइक चोरों के संगठित गिरोह का रांची पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए 7 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह के नेटवर्क की रूपरेखा जेल के अंदर तैयार की गई। जेल से निकलने के बाद अपराधियों ने गैंग बनाया और हाट-बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से बाइक चोरी करना शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, गैंग के लोग बाइक चोरी करने के बाद उसका असली नंबर प्लेट हटाकर फर्जी नंबर लगा देते थे और फिर दूसरे लोगों को चोरी की बाइक बेच दिया जाता था। पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से चोरी की 12 बाइक बरामद की है। गिरफ्तार अभय सिंह उर्फ मन्नू सिंह ने पूछताछ में खुलासा किया कि जेल के अंदर ही उसकी मुलाकात वसीम ओहदार उर्फ वसीम आलम से हुई थी। दोनों बाइक चोरी के आरोप में ही जेल में बंद थे। वहीं जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर बाइक चोरी का संगठित गिरोह खड़ा कर दिया। कुछ बाइक का इंजन काट कर पहचान मिटाने की कोशिश : पुलिस ने गिरोह के पास से अपाचे, पल्सर, स्प्लेंडर, पैशन प्रो समेत कई बाइक बरामद की हैं। कुछ बाइक के इंजन को काटकर उसकी पहचान मिटाने की भीकोशिश की गई थी। रांची पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और शहर के अलग-अलग इलाकों में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में पुलिस जुटी है। गुप्त सूचना के आधार पर ब्लू रंग की अपाचे बाइक ढूंढते-ढूंढते पुलिस बाइक चोरों तक पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले नामकुम के रामपुर की ओर जा रहे अभय नामक युवक को दबोचा। पूछताछ में उसने कई राज उगले। जिसके बाद पुलिस गिरोह का खुलासा करने में सफल रही। गिरफ्तार अपराधियों में कई ऐसे भी शातिर हैं, जो पहले भी बाइक चोरी, फर्जी नंबर प्लेट और धोखाधड़ी के मामलों में जेल जा चुके हैं। अभय सिंह और वसीम आलम पर रांची के कई थानों में पहले से दर्जनों मामले दर्ज हैं।
Source link