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झारखंड हाईकोर्ट ने यौन हिंसा से जुड़े मामले में मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म या यौन हिंसा मामले में अब थाना प्रभारी बिना देर किए जीरो एफआईआर दर्ज करेंगे। फिर उसे संबंधित थाने को भेजेंगे। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई होगी। कोर्ट ने पीड़िता की मेडिकल जांच और बयान दर्ज करने में देरी से बचने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संज्ञेय अपराध, विशेषकर यौन हिंसा मामले में पुलिस क्षेत्राधिकार के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती। साथ ही टू फिंगर टेस्ट को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को इस परीक्षण से बचने का सर्कुलर जारी करना होगा। जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया व झालसा के सुझाव को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने ये आदेश भी दिए झारखंड में रोज महिला हिंसा के 25 केस दर्ज हो रहे झारखंड में रोजाना महिला हिंसा के औसत 25 मामले दर्ज होते हैं। इसमें औसतन 5 से 6 मामले दुष्कर्म के होते हैं, जो कुल आंकड़े का करीब 20 प्रतिशत है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार झारखंड में वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ कुल 8,700 मामले दर्ज हुए, इनमें 1300 दुष्कर्म के मामले थे। वर्ष 2022 में करीब 8900 मामले दर्ज हुए, इनमें दुष्कर्म के 1,350 मामले थे। वर्ष 2023 में दुष्कर्म के करीब 1450 मामले दर्ज हुए थे। इसे देखते हुए अदालत ने महिला हिंसा और दुष्कर्म के मामले में सख्त आदेश दिया है।
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