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ट्रेजरी घोटाला : अफसरों को भी पैसे देने का दावा, वेरिफिकेशन करेगी...




बोकारो एसपी आफिस से पुलिसकर्मियों के नाम पर करीब 11 करोड़ रुपए की अवैध वेतन निकासी मामले की जांच अब बड़े अफसरों की दहलीज तक पहुंच सकती है। इस घोटाले के मास्टरमाइंड और बोकारो एसपी कार्यालय के लेखा शाखा के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त रहे सिपाही कौशल कुमार पांडेय से सीआईडी की विशेष जांच टीम ने तीन दिनों तक रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की। शुक्रवार को रिमांड अवधि समाप्त होने पर एसआईटी ने उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दोबारा न्यायिक हिरासत में होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया गया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सीआईडी की एसआईटी कौशल पांडेय को एक बार फिर रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जिसके लिए अर्जी दाखिल कर दी गई है। अनुमति मिलते ही एसआईटी उसे दोबारा हिरासत में लेगी, ताकि पहले फेज की पूछताछ में मिले तथ्यों का भौतिक सत्यापन किया जा सके। आगे क्या… कौशल के 3 साथियों से भी पूछताछ संभव घोटाला बोकारो एसपी कार्यालय के लेखा शाखा से शुरू हुआ, जहां कौशल पांडेय ही पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। सबसे पहले बोकारो जिला पुलिस ने ही कौशल को दबोच कर जेल भेजा था। उसके तीन सहयोगी सतीश कुमार सिंह जो लेखा शाखा में प्रतिनियुक्त गृह रक्षक था, अशोक कुमार भंडारी एएसआई और सिपाही काजल मंडल इनसे भी एसआईटी जल्द पूछताछ कर सकती है। कौशल का दावा… ऊपर तक गई रकम, पर साक्ष्य नहीं सूत्रों के अनुसार, अबतक की पूछताछ में मास्टरमाइंड कौशल पांडेय ने बेहद चौकाने वाले दावे तो किए हैं, लेकिन उसका साक्ष्य नहीं दे पाया है। उसने कुबूल किया है कि 11 करोड़ रुपए की इस अवैध निकासी का हिस्सा सिर्फ उस तक सीमित नहीं था, बल्कि इस राशि को उसके अन्य सहयोगियों और ऊपर के कुछ अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया था। हालांकि, पहले फेज की रिमांड के दौरान वह इन दावों से जुड़े पुख्ता सबूत या कंक्रीट एविडेंस नहीं दे पाया है। यही वजह है कि एसआईटी अब दोबारा रिमांड लेकर गहराई से जांच करेगी। इस बार कई अन्य संदिग्धों को भी कौशल के सामने बिठा कर पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है। काम करते-करते सीख गया फर्जीवाड़ा अकाउंट सेक्शन में काम करते हुए उसने मैन्युअल से डिजिटल सिस्टम की खामियों को बारीकी से समझा और उसका फायदा उठाया। पुलिस कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन जनरेट करने लगा। वह दो तरह के डेटा शीट तैयार करता, अधिकारियों कुछ और दिखा बिल पास करवा लेता।



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