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भास्कर एक्सपर्ट बोकारो में ट्रेजरी घोटाला सामने आया, इसके बाद कई जिलों में मुख्य रूप से पुलिस और पशुपालन विभाग में धोखाधड़ी करके वेतन निकालने का मामला भी पाया गया। इस धोखाधड़ी में सरकारी फंड को हड़पने के लिए पेरोल सिस्टम में ‘’फर्जी’’ कर्मचारी बनाने या रिटायर हो चुके कर्मचारियों को फिर से सक्रिय करने का काम किया गया। इस कारण 07 मई तक वेतन-भत्ता और मानदेय कर्मियों को नहीं मिल सका है। हालांकि इस संबंध में विभागीय अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि पोर्टल में आवश्यक बदलाव और व्यवस्था में सुधार के कारण विलंब हो रहा है। इसके बाद अब सख्ती बरती जा रही है और डीसी अजय नाथ झा के आदेश पर वेतन के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इससे कर्मियों के समक्ष सैलरी संकट आ गया है। कर्मियों के अनुसार लोन की किस्तें, बच्चों के स्कूल फीस और दैनिक खर्च के लिए परेशान हैं। वहीं कुछ लोगों के घरों में शादियां फिक्स है। लग्न का महीना भी शुरू हो गया है। ऐसे में उन्हें पैसों की जरूरत है। जिले के पुलिस,स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग समेत करीब 10343 कर्मी वेतन की आस में है। बिना सत्यापन वेतन भुगतान नहीं आदेश के अनुसार, सभी कर्मचारियों को अपने कर्तव्य भत्ते की निकासी से पूर्व एक फॉर्म भरकर अपना सत्यापन करवाना होगा। विभागीय पदाधिकारी को सभी कर्मियों से शीघ्र ही विवरण लेने का निर्देश दिया गया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि अपने विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मियों से विहित प्रपत्र में जानकारी व दस्तावेजों की छाया प्रति के साथ फार्म भरवाना सुनिश्चित करेंगे। ऑडिट के बाद ही होगा वेतन भुगतान : डीसी बोकारो कोषागार में 105 और तेनुघाट में 63 डीडीओ
बोकारो कोषागार में 105 और तेनुघाट में 63 डीडीओ कोड है। इससे जिले के हजारों सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों और अनुबंधित मानदेय कर्मियों के वेतन का भुगतान होता है। बोकारो डीसी के रोक के बाद अब सभी डीडीओ अपने निकासी की जांच करने में जुटे हैं। जांच पूरी होने पर ही भुगतान होगा। स्वास्थ्य विभाग में कुल 17 डीडीओ हैं। रंजीत गिरिअधिवक्ताबोकारो सिविल कोर्ट जांच जरूरी, लेकिन नियमित कर्मियों का वेतन लंबी अवधि तक रोकना उचित नहीं ट्रेजरी या पेरोल सिस्टम में गड़बड़ी मिलने पर प्रशासन को सत्यापन और ऑडिट कराने का पूरा अधिकार है। लेकिन पूरी व्यवस्था ठप कर देना अंतिम विकल्प होना चाहिए। यदि कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड, उपस्थिति और नियुक्ति स्पष्ट है, तो उसका वेतन रोके जाने से प्रशासनिक असंतोष बढ़ता है। भास्कर एक्सक्लूिसव
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