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झारखंड हाईकोर्ट ने 2008 के सड़क हादसे में घायल दो पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा करीब 24 गुना बढ़ा दिया। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के आदेश को खारिज करते हुए विकास कुमार केसरी का मुआवजा 67,500 रुपए से बढ़ाकर 16.50 लाख रुपए और यशोदा देवी का 37,600 रुपए से बढ़ाकर 11.25 लाख रुपए कर दिया। दोनों को दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7.5% सालाना ब्याज भी मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि मोटरसाइकिल पर तीन लोगों के बैठने के आधार पर मुआवजे में 50% कटौती नहीं की जा सकती। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि तीन सवारी होने और हादसे के बीच सीधा संबंध था या इससे चोट की गंभीरता बढ़ी। केवल ट्रैफिक नियम तोड़ने से घायल को हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। बीमा कंपनी ऐसा संबंध साबित नहीं कर सकी। उसे छह सप्ताह में मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया गया वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरुरी है 18 साल पहले ट्रैक्टर ने बाइक को मारी थी टक्कर: घटना 8 अक्टूबर 2008 की है। विकास कुमार केशरी, यशोदा देवी और एक अन्य व्यक्ति बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए। विकास के दाहिने घुटने में स्थायी जकड़न, पैर छोटा होने और दृष्टि संबंधी परेशानी हुई। मेडिकल रिपोर्ट में दिव्यांगता 60% थी। दोनों का करीब एक साल इलाज चला। ट्रिब्यूनल ने लापरवाही मानते हुए 50% मुआवजा काटा: अधिकरण ने बाइक पर तीन लोगों के सवार होने को अंशदायी लापरवाही मान मुआवजे में 50% कटौती की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि आय का दस्तावेजी प्रमाण नहीं होने से घायल की बताई आय को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने विकास की मासिक आय 6,500 व यशोदा की 5,500 रुपए मानी। दोनों की भविष्य की आय में 40% वृद्धि भी जोड़ी। शरीर की चोट नहीं, कमाने की क्षमता भी देखेगा कोर्ट: कोर्ट ने कहा कि दिव्यांगता तय करते समय केवल मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज प्रतिशत देखना पर्याप्त नहीं है। चोट से व्यक्ति की कमाने की क्षमता कितनी प्रभावित हुई, यह भी देखना होगा। विकास की मेडिकल दिव्यांगता 60% थी, लेकिन कार्यात्मक दिव्यांगता 70% मानी गई। यशोदा की कार्यात्मक दिव्यांगता 60% मानी गई। बाइक पर तीन सवारी बैठाने पर मुआवजे में कटौती नहीं हो सकती मोटरसाइकिल पर तीन सवारी बैठना मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन इससे मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती। बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि तीन सवारी होने के कारण हादसा हुआ या चोट की गंभीरता बढ़ी। अगर साबित नहीं हो पाया तो मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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