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केंद्र सरकार ने बच्चों और महिलाओं की ऑनलाइन सेफ्टी के लिए सख्त कदम उठाए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब आपत्तिजनक कंटेंट सिर्फ 3 घंटे में हटाना होगा. डीपफेक और एआई जनरेटेड फर्जी कंटेंट पर भी पैनी नजर रखी जाएगी. इसके अलावा डीपीडीपी एक्ट के तहत बच्चों के डेटा प्रोसेस के लिए पैरेंट्स की इजाजत जरूरी होगी. लोकसभा में मंत्रियों ने इन नए नियमों की जानकारी दी है.
साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं, गुमनाम शिकायत से लेकर सस्पेक्ट चेक करने तक सरकार ने दिए ये नए हथियार. (AI Generated Image)
नई दिल्ली: इंटरनेट पर बच्चों और महिलाओं की सेफ्टी को लेकर केंद्र सरकार अब अलर्ट मोड में आ गई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मनमानी अब नहीं चलेगी. सरकार ने डिजिटल सुरक्षा का ढांचा मजबूत करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी है. उन्होंने साफ किया कि बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट पर कंपनियों को पैनी नजर रखनी होगी. अगर कोई कोर्ट या सरकार आदेश देती है तो आपत्तिजनक मैटर 3 घंटे में हटाना होगा. इसके अलावा डीपफेक और एआई वाले फर्जी कंटेंट पर भी शिकंजा कसा गया है. सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ एल मुरुगन ने भी लोकसभा में कई अहम बातें बताई हैं. डॉ मुरुगन ने कहा, ‘भारत का इंटरनेट सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जाएगा’. सोशल मीडिया कंपनियों को एआई कंटेंट रोकने के लिए तकनीकी व्यवस्था करनी ही होगी.
डीपीडीपी एक्ट से बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी कैसे सेफ होगी?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत सरकार ने बच्चों के लिए कड़े नियम बनाए हैं. अब किसी भी बच्चे का डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की रजामंदी बहुत जरूरी होगी. बच्चों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और उनके बिहेवियर की मॉनिटरिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. बच्चों को टार्गेट करके दिखाए जाने वाले विज्ञापनों पर भी बैन लगा दिया गया है. सोशल मीडिया कंपनियों को पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध की रिपोर्ट करना अब अनिवार्य है. संबंधित एजेंसियों को समय पर जानकारी देनी होगी.
इंटरनेट पर डीपफेक और फर्जी कंटेंट से निपटने का क्या प्लान है?
सरकार ने 10 फरवरी 2026 से नए आईटी नियम लागू कर दिए हैं. इसके तहत डीपफेक और एआई से बने फर्जी कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है. कंपनियों को इसे रोकने के लिए अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करने होंगे. अगर कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों को नहीं मानता है तो उसे कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी. उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा. माइटी के आईएसईए प्रोग्राम के तहत अब तक हजारों वर्कशॉप हो चुकी हैं. इनमें 11 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए हैं. सरकार और सर्ट-इन साइबर सेफ्टी के लिए लगातार हैंडबुक और वीडियो जारी कर रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई ने भी स्कूलों में साइबर सेफ्टी को सिलेबस का हिस्सा बना दिया है.
साइबर क्राइम की शिकायत के लिए सरकार ने कौन से नए फीचर जोड़े हैं?
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अब महिलाएं और बच्चे गुमनाम रहकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. एनसीआरपी पोर्टल पर एक नया रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट फीचर भी जोड़ा गया है. इसके जरिए लोग संदिग्ध वेबसाइट और व्हाट्सएप नंबर की जांच आसानी से कर सकते हैं. आप टेलीग्राम हैंडल और डीपफेक वाले सोशल मीडिया लिंक की भी सीधे शिकायत कर सकते हैं. आई4सी ने एनसीसी और एनएसएस के 2 लाख से ज्यादा छात्रों को साइबर सेफ्टी की ट्रेनिंग दी है. महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध रोकने के लिए राज्यों को 132 करोड़ से ज्यादा का फंड दिया गया है. देश में 33 जगहों पर साइबर फॉरेंसिक लैब शुरू की गई हैं. 24 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को फॉरेंसिक और क्राइम जांच की ट्रेनिंग दी जा चुकी है.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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