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Jaipur Tirupati Balaji Mandir: जयपुर में स्थित वेंकटेश तिरूपति बालाजी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है. इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के स्वरूप में तिरूपति बालाजी के दर्शन होते हैं, जिससे भक्तों को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर जैसी आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है. मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान दक्षिण भारतीय परंपराओं एवं वैदिक विधियों के अनुसार संपन्न किए जाते हैं. मंदिर का शांत वातावरण, भव्य वास्तुकला और धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. बड़ी संख्या में भक्त यहां नियमित रूप से दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. विशेष पर्वों और उत्सवों के दौरान मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है. जयपुर का यह मंदिर उन लोगों के लिए खास आकर्षण है.
जयपुर: जयपुर के चारदीवारी बाजार में कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं जहां दर्शन के लिए भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं. खासतौर चारदीवारी बाजार जहां भारत के भव्य मंदिर में विराजमान भगवानों के स्वरूप नज़र आते हैं. ऐसे ही जयपुर के जोहरी बाजार में स्थित आंध्र प्रदेश के तिरूपति बालाजी मंदिर के स्वरूप में विराजमान श्री वैंकटेश तिरूपति बालाजी मंदिर जो जयपुर में सबसे प्राचीन तिरूपति बालाजी का मंदिर हैं. जहां मंदिर में दक्षिण भारतीय परम्परा की झलक देखने को मिलती हैं. लोकल-18 ने जोहरी बाजार के इस तिरूपति बालाजी मंदिर में पहुंच कर मंदिर के इतिहास के बारे में मंदिर के पुजारी से बात की तो वह बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1985 में श्री देवनारायण जी आचार्य महाराज द्वारा की गई थी.
जहां दक्षिण भारतीय परम्परा के साथ भगवान तिरूपति बालाजी की पूजा होती हैं और लोग यहां हर दिन दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं. हालांकि मंदिर जयपुर के अन्दर मंदिरों के मुकाबले छोटा हैं लेकिन यहां प्रवेश करते ही दक्षिण भारत के मंदिर जैसी आभा नजर आती हैं.
दिन में 7 बार होती हैं तिरूपति बालाजी की आरती और भोग
लोकल-18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी बताते हैं जोहरी बाजार में स्थित यह तिरूपति बालाजी का मंदिर जयपुर के लोग यहां आंध्र प्रदेश स्थित तिरूपति बालाजी के स्वरूप में विराजमान भगवान विष्णु के अवतार के दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर में हर दिन अलग-अलग झांकियां और आरती दिन में 7 बार होती हैं, जिसमें सुबह-शाम अलग-अलग आरती और भोग का समय अलग-अलग हैं. मंदिर में स्थापित तिरूपति बालाजी की मूर्ति में आंध्र प्रदेश स्थित वैंकटेश तिरूपति बालाजी के स्वरूप में यहां दर्शन होते हैं. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि हर दिन मंदिर में जोहरी बाजार के व्यापारी यहां सबसे ज्यादा दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर में 5 स्वामी हैं जो पूरे दिन तिरूपति बालाजी की सेवा-पूजा में लगे रहते हैं.
जयपुर में तिरूपति बालाजी की अनोखी आभा
लोकल-18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी बताते हैं कि वैसे तो जयपुर में कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन कोई प्राचीन तिरूपति बालाजी मंदिर नहीं हैं. यह चारदीवारी बाजार और जयपुर का एकमात्र ऐसा अनोखा मंदिर हैं, जहां मंदिर में स्थापित तिरूपति बालाजी की मूर्ति तिरूपति से ही लाकर यहां स्थापित की गई थी. इसलिए मंदिर की वास्तुकला कला दक्षिण भारत शैली में ही बनी हैं और मंदिर के अंदर भी दक्षिण भारत के मंदिरों की तरह भक्ति भाव की आभा नजर आती हैं. मंदिर में स्थापित तिरूपति बालाजी सोने चांदी से सजे सिंहासन पर विराजमान हैं. मंदिर में दक्षिण भारत के मंदिरों के इतिहास के लिए प्राचीन मंदिरों की तस्वीरें लगी हैं, जिससे चलते मंदिर की झलक पूरी तरह दक्षिण भारत के सुंदर मंदिरों की तरह दिखाई देती हैं.
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