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तिलैया डैम के पास लगती है राजा की मछली की दुकान, रोज...


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Koderma Tilaiya Dam Fish Seller: कभी दूसरे राज्यों में पोकलेन मशीन चलाकर 10-12 हजार रुपये कमाने वाले राजा कुमार ने गांव लौटकर तिलैया डैम के पास फिश सेंटर शुरू किया. आज उनके यहां रोज 300-400 किलो ताजी मछलियों की बिक्री हो रही है और वे हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं.

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कोडरमा. जिले के तिलैया डैम के समीप स्थित जामु खाड़ी गांव के रहने वाले राजा कुमार आज स्वरोजगार की मिसाल बन चुके हैं. कभी दूसरे राज्यों में पोकलेन मशीन ऑपरेटर के रूप में काम करने वाले राजा कुमार आज अपने राजा फिश सेंटर के जरिए न केवल अच्छी आमदनी कर रहे हैं, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं. विशेष बातचीत में राजा कुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक वे रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशों में जाकर पोकलेन मशीन ऑपरेटर के रूप में काम करते थे. उस समय उन्हें प्रति माह मात्र 10 से 12 हजार रुपये वेतन मिलता था. कई बार मशीन मालिकों द्वारा दो-तीन महीने तक वेतन नहीं दिया जाता था. जिससे आर्थिक परेशानियों के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता था.

गांव लौटने के बाद सड़क किनारे शुरू किया फिश सेंटर
इन कठिन परिस्थितियों से परेशान होकर राजा ने अपने गांव लौटने का फैसला लिया. गांव वापस आने के बाद उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया और तिलैया डैम के समीप सड़क किनारे राजा फिश सेंटर नाम से एक स्टॉल की शुरुआत की. उन्होंने तिलैया डैम में उपलब्ध ताजी मछलियों का व्यवसाय शुरू किया, जो धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय होता चला गया.

आज स्थिति यह है कि रांची-पटना मुख्य मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर उनके फिश सेंटर पर रुककर ताजी मछलियां खरीदते हैं. स्थानीय लोगों के अलावा झारखंड और बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले ग्राहक भी यहां की मछलियों की गुणवत्ता और ताजगी के कारण आकर्षित होते हैं.

कई प्रकार की ताजी मछलियां मिलती हैं
राजा ने बताया कि उनके फिश सेंटर पर रेहू, कतला, झींगा, डोरी, टेलापिया, बामी, टेंगरा सहित कई किस्म की ताजी मछलियां उपलब्ध रहती हैं. उन्होंने कहा कि यहां मिलने वाली सभी मछलियां तिलैया डैम से निकाली जाती हैं और पूरी तरह ताजी होती हैं. उनके फिश सेंटर पर प्रतिदिन 300 से 400 किलोग्राम तक मछलियों की बिक्री होती है. इससे उनका मासिक कारोबार औसतन 75 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाओं को भी दिखाती है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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