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दिल्ली की 44% सड़कों से फुटपाथ गायब, MCD ने बना दिया ‘पेड...


नई दिल्ली. दिल्ली की सड़कों पर हर दिन लाखों लोग पैदल चलते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनके चलने के लिए सचमुच कोई जगह बची है? कहीं फुटपाथ कारों की पार्किंग में बदल चुके हैं, कहीं रेहड़ी-पटरी ने रास्ता घेर रखा है, तो कहीं फुटपाथ ही गायब हैं. ऐसे हालात में आम नागरिक जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलने को मजबूर हैं. अब इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि फुटपाथ पर चलना कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. अदालत ने कहा है कि पैदल यात्रियों का अधिकार मोटर वाहनों से ऊपर है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है – क्या दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलने वालों को उनका संवैधानिक हक मिल पाएगा, या फुटपाथ यूं ही पार्किंग और अतिक्रमण की भेंट चढ़े रहेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने तय फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया है. जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में (जिसमें पांच वर्षीय बच्चे की मौत हुई थी) फैसला सुनाते हुए कहा कि नागरिकों का निर्धारित फुटपाथों पर चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत स्वतंत्रताओं और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार को मोटर वाहनों पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

अदालत ने कहा कि फुटपाथों पर पहला अधिकार पैदल यात्रियों का है. इस फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – ऐसे शहर में जहां फुटपाथ अक्सर अतिक्रमण, क्षतिग्रस्त या पूरी तरह गायब हैं, आखिर पैदल चलने वालों के लिए कितनी जगह बची है? वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक के. सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पैदल चलने वालों की जगहों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी को मजबूत करके इस स्थिति को बदलने में मदद कर सकता है.

उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “यह फैसला लोगों में पैदल यात्रियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा. इससे अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और यह संदेश जाएगा कि सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा तथा नागरिकों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना सरकारी एजेंसियों का संवैधानिक दायित्व है.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह समस्या विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के क्षेत्रों में अधिक दिखाई देती है. उन्होंने कहा, “दिल्ली में आप देखेंगे कि एमसीडी और एनडीएमसी दोनों ने फुटपाथों को पार्किंग की जगहों में बदल दिया है. इन फुटपाथों पर गाड़ियां कतार में खड़ी रहती हैं, जिससे पैदल चलने वालों के लिए बहुत कम या बिल्कुल भी जगह नहीं बचती.”

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से मार्च के बीच दिल्ली यातायात पुलिस ने गलत या रास्ता रोकने वाली पार्किंग के लिए मौके पर 4,30,202 चालान जारी किए, जो शहर में यातायात नियमों के उल्लंघन का सबसे आम मामला रहा. सिंह ने कहा, “कई जगहों पर मामला सिर्फ पार्किंग तक ही सीमित नहीं है. ऐसा लगता है कि इन फुटपाथों को पार्किंग के काम के लिए पट्टे पर दे दिया गया है. अगर आप दिल्ली में कहीं भी फुटपाथ पर अपनी गाड़ी रोकते हैं, तो कुछ ही सेकंड में कोई न कोई आपके पास आकर पार्किंग की पर्ची थमा देगा; अक्सर ये पर्चियां एनडीएमसी से मंजूर पार्किंग व्यवस्था के तहत जारी की जाती हैं. इन फुटपाथों पर खड़ी गाड़ियों से पार्किंग फीस वसूलने के लिए संचालकों को लाइसेंस दिए गए हैं.”

ये बातें उन अनुभवों को दर्शाती हैं जिनका सामना कई निवासी रोजाना करते हैं. दिल्ली के रहने वाले रोशन कुमार ने कहा, “इससे बहुत परेशानी हो रही है. सरकार ने पहले इस मामले में कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन समय के साथ यह समस्या और भी साफ तौर पर दिखाई देने लगी है. लोगों के चलने के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं बची है.” कुमार ने बताया कि कुछ ही दिन पहले अपने बच्चे के साथ टहलते समय एक दुर्घटना में वह बाल-बाल बच गए. उन्होंने कहा, “पैदल चलने वालों के लिए मुश्किल से ही कोई जगह बची है और पूरी जगह पर कब्जा कर लिया गया है. जनता के लिए इसके लिए जिम्मेदार लोगों को चुनौती देना या यह जानना भी मुश्किल है कि इस समस्या के लिए किससे संपर्क करें.”

एक अन्य निवासी संजय कुमार ने कहा कि इस स्थिति का सबसे अधिक नुकसान पैदल यात्रियों को उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा, “फुटपाथों पर पार्किंग की यह व्यवस्था ही गलत है. जैसा कि आप देख सकते हैं, यहां बड़ी संख्या में वाहन खड़े हैं, जबकि उनका फुटपाथ पर कब्जा करने का कोई उचित कारण नहीं है.” उन्होंने कहा, “कई इलाकों में तो फुटपाथ दिखाई ही नहीं देते.”

शैक्षणिक शोध भी इसी गंभीर स्थिति की पुष्टि करते हैं. आईआईटी दिल्ली के ‘ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर’ ने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के साथ मिलकर एक अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि दिल्ली की लगभग 44 प्रतिशत सड़कों पर फुटपाथ नहीं हैं. दिल्ली पुलिस के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 649 पैदल यात्रियों की मौत हुई और 1,738 घायल हुए. पैदल यात्रियों की सबसे अधिक मौत निजी कारों (92) से हुईं, इसके बाद दोपहिया वाहनों (75) और भारी मालवाहक वाहनों (43) का स्थान रहा. आईआईटी दिल्ली के अध्ययन में यह भी बताया गया कि 2022 में दिल्ली में हुई 1,461 घातक सड़क दुर्घटनाओं में 43 प्रतिशत मृतक पैदल यात्री थे.



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