![]()
सतगांवां प्रखंड के कानीकेंद गांव की 14 वर्षीय चांदनी कुमारी जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। वह एक पैर से भी दिव्यांग हैं, लेकिन इसके बावजूद अपने एकमात्र सक्षम पैर से पढ़ाई कर रही हैं और अपना भविष्य लिख रही हैं। चांदनी की लिखावट इतनी सुंदर और स्पष्ट है कि पहली नजर में कोई विश्वास नहीं कर पाता कि यह पैर से लिखी गई है। उनकी कॉपियों के पन्ने उनके संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाते हैं। उन्होंने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई उत्क्रमित मध्य विद्यालय, कानीकेंद से पूरी की है। वर्तमान में वह उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पोखरडीहा में नौवीं कक्षा की छात्रा हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद वह प्रतिदिन विद्यालय जाती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, चांदनी ने बचपन से ही अपनी दिव्यांगता को कभी कमजोरी नहीं माना। उन्होंने अपने पैर को ही अपना सहारा बनाया और उसी के दम पर लिखना, पढ़ना तथा दैनिक कार्य करना सीखा। उनका आत्मविश्वास पूरे परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गांव के लोग चांदनी को समाज की एक अमूल्य धरोहर मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को ऐसे बच्चों तक छात्रवृत्ति, आधुनिक सहायक उपकरण, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और अन्य आवश्यक योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाना चाहिए, ताकि उनकी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में दबकर न रह जाए।
Source link