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धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषणों और नए बर्तनों की खरीदारी के साथ ही घर में नई झाड़ू लाने की समृद्ध धार्मिक परंपरा है। धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है। स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाने वाली झाड़ू की मांग दीपावली के मद्देनजर बाजारों में तेज हो गई है। हालांकि, इस बार झाड़ू के दामों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है। फूल झाड़ू जहां ₹80 से ₹120 तक बिक रही है, वहीं पारंपरिक ‘बढ़नी’ का क्रेज भी गांवों से लेकर शहरों तक बना हुआ है। इस साल बाजार में झाड़ू की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अपर बाजार के झाड़ू विक्रेता पुनीत कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार बाजार में झाड़ू की आवक कम है। फूल झाड़ू बनाने के लिए जरूरी विशेष घास का मुख्य उत्पादन असम के कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में होता है। साल 2026 में असम में आई भीषण बाढ़ के कारण इस घास की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कच्चे माल की कमी हो गई और फूल झाड़ू के दाम बढ़ गए। बदलते दौर और घरों के आधुनिक फर्श के कारण पारंपरिक बढ़नी की जगह धीरे-धीरे फूल और नारियल झाड़ू ने ले ली है। इसके बावजूद पारंपरिक बढ़नी की अपनी खास पहचान बरकरार है। भास्कर एक्सपर्ट- शालिनी वैद्य, ज्योतिषी जहां सफाई… वहीं लक्ष्मी का वास दीपावली और धनतेरस पर झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। झाड़ू घर से दरिद्रता, अलक्ष्मी और नकारात्मकता को दूर कर स्वच्छता व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। जिस घर में साफ-सफाई रहती है, वहीं मां लक्ष्मी का वास होता है।
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