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धान का बूढ़ा बिचड़ा कम कर सकता है पैदावार, स्टेगर विधि से बनाएं नर्सरी

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Palamu Paddy Cultivation Preparation: मानसून के साथ ही धान की खेती की तैयारी ने जोर पकड़ लिया है. इस समय धान का बिचड़ा तैयार करने का सबसे अच्छा टाइम है. इस बारे में कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह का कहना है कि स्टेगर विधि से बिचड़ा तैयार करें ताकि रोपाई के समय वो बहुत पुराना न हो. पुराना बिचड़ा जिसे बूढ़ा कहते हैं, रोपने से धान अच्छा नहीं होता.

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पलामू. पलामू में मानसून की सक्रियता के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे धान की खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं. कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह ने कहा कि वर्तमान समय धान का बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त है. पलामू के जिन किसानों ने अब तक नर्सरी नहीं डाली है, वे खेत में कीचड़ तैयार कर धान का बिचड़ा लगा सकते हैं. हालांकि, इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका बनी हुई है. ऐसे में किसानों को पारंपरिक तरीके की बजाय वैज्ञानिक एवं तकनीकी विधि अपनाने की सलाह दी जा रही है, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर फसल पर कम पड़े.

इस विधि से तैयार करें बिचड़ा
उन्होंने बताया कि अगर किसान के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं और वह एक साथ पूरे खेत के लिए बिचड़ा तैयार कर देता है, तो बारिश में देरी होने पर नर्सरी बूढ़ी हो सकती है. बूढ़ा बिचड़ा खेत में रोपाई के बाद अच्छी बढ़वार नहीं कर पाता, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. इसलिए किसानों को स्टेगर (चरणबद्ध) विधि से बिचड़ा तैयार करना चाहिए.

इस विधि से तैयार करें बिचड़ा
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी किसान के पास लगभग 15 कट्ठे में धान की खेती करनी है, तो वह एक साथ पूरे क्षेत्र का बिचड़ा तैयार करने के बजाय पहले पांच कट्ठे के लिए बीज गिराए. इसके पांच से 10 दिन बाद अगले पांच कट्ठे के लिए नर्सरी तैयार करें और फिर लगभग एक सप्ताह बाद शेष पांच कट्ठे का बिचड़ा लगाएं. इस तकनीक से अलग-अलग समय पर तैयार होने वाली नर्सरी उपलब्ध रहेगी और बारिश के अनुसार उपयुक्त उम्र का बिचड़ा रोपाई के लिए मिल जाएगा. इससे उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी और मौसम का जोखिम कम होगा.

नर्सरी तैयार करते समय खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई कम्पोस्ट खाद का प्रयोग जरूर करना चाहिए. कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है. इससे बिचड़ा उखाड़ने के दौरान पौधों के टूटने की संभावना कम हो जाती है और रोपाई के बाद पौधे तेजी से स्थापित हो जाते हैं.

खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी
खरपतवार नियंत्रण के लिए भी शुरुआत से ही सावधानी जरूरी है. नर्सरी में खरपतवार की समस्या से बचने के लिए प्रति लीटर पानी में 2 मिली प्रीटीलाक्लोर (Pretilachlor) या प्रति लीटर पानी में 5 मिली पेंडीमेथालिन (Pendimethalin) मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है. इससे खरपतवार का प्रकोप कम होगा और धान के पौधों को पर्याप्त पोषण मिलेगा. उन्होंने बताया कि बदलते मौसम को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई नर्सरी ही किसानों को बेहतर और सुरक्षित उत्पादन दिला सकती है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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