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धान की सीधी बुआई से घटेगी लागत, बढ़ेगा मुनाफा; ड्रम सीडर से...


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धान की सीधी बुआई से घटेगी लागत, ड्रम सीडर मशीन पर मिलेगा रहा 50% अनुदान

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धान की सीधी बुआई (डायरेक्ट सीडेड राइस) से लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. ड्रम सीडर मशीन से एक दिन में एक हेक्टेयर तक बुआई हो सकती है. इससे मजदूरों पर निर्भरता घटेगी और 80 प्रतिशत श्रम बचेगा. कृषि विभाग इन मशीनों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रहा है.

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पलामूः खरीफ सीजन में किसान खेती के लिए तैयारी में लगे है. पारंपरिक खेती को लेकर लगातार प्रयास जारी है. खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए सीधी बुआई (डायरेक्ट सीडेड राइस) एक बेहतर और किफायती विकल्प बनकर उभर रही है. इस तकनीक से किसानों को नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई कराने जैसी श्रमसाध्य प्रक्रियाओं से राहत मिलती है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि यदि खेत में पर्याप्त कीचड़ तैयार हो और अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाए, तो किसान ड्रम सीडर या सीड ड्रिल मशीन की मदद से कम समय में बड़े क्षेत्र में धान की बुआई कर सकते हैं. इससे श्रम, समय और लागत तीनों की बचत होती है, जबकि उत्पादन भी रोपा विधि के बराबर मिलता है.

आगे कहा कि पारंपरिक रोपा विधि में एक हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई के लिए लगभग 30 मजदूरों की जरूरत पड़ती है. वहीं सीधी बुआई तकनीक अपनाने पर केवल एक व्यक्ति ड्रम सीडर मशीन की सहायता से एक ही दिन में लगभग एक हेक्टेयर तक धान की बुआई कर सकता है. यदि खेत की स्थिति अनुकूल हो तो एक व्यक्ति तीन एकड़ तक भी आसानी से बुआई कर सकता है. इससे किसानों की मजदूरों पर निर्भरता काफी कम हो जाती है.

खेत का समतल होना बेहद जरूरी
उन्होंने बताया कि सीधी बुआई की सफलता के लिए खेत का समतल होना बेहद जरूरी है. यदि खेत ऊबड़-खाबड़ होगा तो बीज एक समान नहीं गिरेंगे, जिससे पौधों का जमाव प्रभावित हो सकता है. इसलिए बुआई से पहले खेत में अच्छी तरह कीचड़ तैयार कर अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए और फिर समतल खेत में मशीन से बुआई करनी चाहिए. इससे बीज समान दूरी पर गिरते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है.

आगे कहा कि इस तरह तकनीक से लगभग 80 प्रतिशत तक श्रम और समय की बचत होती है. साथ ही प्रति हेक्टेयर करीब 2,500 से 3,000 रुपये तक की लागत भी कम हो जाती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीधी बुआई से मिलने वाला उत्पादन पारंपरिक रोपा विधि के बराबर ही रहता है. ऐसे में किसानों को कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलता है.

50 प्रतिशत तक अनुदान
आगे बताया कि ड्रम सीडर और सीड ड्रिल जैसी मशीनें किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से अनुदान पर भी उपलब्ध कराई जाती हैं. सरकार की योजना के तहत इन मशीनों पर लगभग 50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है. कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि खेती को अधिक लाभकारी, श्रम-किफायती और समयबद्ध बनाया जा सके. आने वाले समय में धान की सीधी बुआई किसानों के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ खेती पद्धति साबित हो सकती है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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