भास्कर न्यूज| दुमका दुमका के गोपीकांदर प्रखंड के ओड़मो पंचायत भवन परिसर में शुक्रवार को आयोजित बैठक के दौरान नवेली उत्तर प्रदेश पावर प्रोजेक्ट कंपनी के अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा है। आरोप है कि बैठक के दौरान नाराज ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों को पंचायत भवन में रोक कर रखा और इन पर पांच लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया। समाचार लिखे जाने तक अधिकारी और ग्रामीण पंचायत भवन में ही मौजूद थे। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रमेश गोटे,अनुज कुमार सहित आधा दर्जन अधिकारी माहुलडाबर, कुंडापहाड़ी और चीरुडीह गांव के रैयतों के साथ बातचीत करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान बैठक में समाजसेवी मुन्नी हांसदा भी बैठक में उपस्थित हुई और स्थानीय ग्रामीणों की मांगों का पूर्ण रूप से समर्थन किया। पंचायत के मुखिया जोगाई गृही ने कहा कि 29 जुलाई को भी बैठक बुलाई गई थी लेकिन उस समय प्रोजेक्ट मैनेजर उपस्थित नहीं हुए थे। इसके बाद कंपनी को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांगों पर लिखित जवाब देने को कहा गया था। शुक्रवार को प्रोजेक्ट मैनेजर बैठक में पहुंचे लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने उनकी किसी भी मांग पर लिखित आश्वासन नहीं दिया। इसी बीच कंपनी द्वारा जारी एक पत्र भी विवाद का कारण बन गया। पत्र में माहुलडाबर, कुंडापहाड़ी और चीरुडीह गांव के ग्राम प्रधानों से बैठक में भाग नहीं लेने की अपील करते हुए मुआवजे से संबंधित दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया गया था। ग्रामीणों ने इसे गांवों में भ्रम फैलाने का प्रयास बताते हुए कड़ा विरोध जताया। उनका आरोप था कि कंपनी ग्रामीणों के बीच गलत माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। इसी आरोप के आधार पर ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों पर पांच लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है ।
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