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प्रवीण राय|गिरिडीह गिरिडीह प्रखंड की बरहमोरिया पंचायत… एक ऐसा इलाका जिसे कुछ लोगों ने महुआ शराब की अवैध चुलाई और नशे के कारोबार से बदनाम कर रखा था। जहां पुलिस की दबिश भी बेअसर साबित हो रही थी, वहां मंगलवार की शाम एक अनोखी और बेहद सकारात्मक तस्वीर सामने आई। सूबे में चल रहे राज्यव्यापी नशा मुक्ति अभियान के तहत जिले की पूरी प्रशासनिक टीम सीधे इस ”रेड जोन” में पहुंच गई। अंधेरा ढलते ही बरहमोरिया पंचायत सचिवालय में ”रात्रि चौपाल” सजी। कोई वीआईपी स्टेज नहीं, कोई तामझाम नहीं। सूबे के उपायुक्त रामनिवास यादव, पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार और उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी जमीन पर दरी बिछाकर ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों के बीच बैठ गए। गिरिडीह के इतिहास में यह पहली ऐसी रात्रि चौपाल थी, जहां सिर्फ और सिर्फ नशामुक्ति और समाज सुधार पर सीधी बात हुई। इस ऐतिहासिक रात्रि चौपाल में नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ, अपर समाहर्ता वैभव कुमार सिंह, आईएएस प्रशिक्षु यश कुमार समेत जिले के तमाम आला अधिकारी देर रात तक डटे रहे। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से अधिकारियों का स्वागत किया। चौंकाने वाली पहलू ये रही कि जिस गांव में कभी शाम ढलते ही शराबियों का जमावड़ा लगता था, वहां आधी रात को सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने एक सुर में ”नशा मुक्त समाज” बनाने का संकल्प लिया। प्रशासन की इस सकारात्मक और संवेदनशील पहल ने बरहमोरिया के लोगों को यह भरोसा दिलाया है कि वे अकेले नहीं हैं, इस सामाजिक बुराई के खिलाफ पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है। जब 98% नंबर लाने वाली बेटी ने बयां किया दर्द चौपाल का सबसे भावुक पल तब आया जब स्कूल में पढ़ने वाली एक छोटी बच्ची ने डीसी रामनिवास यादव से सीधा संवाद किया। बच्ची ने भरी आंखों से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा पहले मेरे घर का माहौल बहुत खराब रहता था। पापा रोज शराब के नशे में धुत होकर घर आते थे। मां परेशान रहती थी और घर में हमेशा कलह होती थी। लेकिन इस खौफनाक माहौल के बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी और मैट्रिक परीक्षा में 98 प्रतिशत मार्क्स लेकर आई।” बच्ची की यह बात सुनकर चौपाल में सन्नाटा पसर गया। डीसी रामनिवास यादव ने भावुक होकर पूरी चौपाल के सामने उस बहादुर बेटी की पीठ थपथपाई और उसकी तारीफ करते हुए कहा कि इस नशीले जहर के खिलाफ हम सबों को इस बच्ची की तरह ही हिम्मत दिखाकर लड़ना है। खोरठा में संवाद: “नशा से बर्बाद हवउ है घर-संसार चौपाल में मौजूद महिलाओं का दिल तब जीत लिया गया, जब उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने मंच से नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच बैठकर उनकी अपनी स्थानीय ”खोरठा” भाषा में बात करनी शुरू की। डीडीसी ने सहज और आत्मीय अंदाज में महिलाओं और युवाओं को समझाया कि नशे की लत कैसे हंसते-खेलते परिवार को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से बर्बाद कर देती है। स्थानीय बोली में किए गए इस संवाद का असर यह हुआ कि जो महिलाएं शुरुआत में झिझक रही थीं, उन्होंने खुलकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखी। महिलाओं ने कहा कि वे इस धंधे और नशेबाज़ों से तंग आ चुकी हैं और अब बदलाव चाहती हैं।
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