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‘पड़ोसी पहले भी आसान नहीं थे’, श्रीलंका से मालदीव और बांग्लादेश तक…...


नई दिल्ली. पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत के रिश्तों और क्षेत्रीय चुनौतियों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अहम बयान दिया है. उन्होंने प्यू रिसर्च सेंटर के हालिया सर्वे का हवाला दिया. जयशंकर ने बताया कि श्रीलंका के करीब 79 प्रतिशत लोग भारत को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दिखाता है कि पड़ोसी देश भारत की भूमिका और सहयोग को कितनी अहमियत देते हैं.

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में तमाम कूटनीतिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपने पड़ोसियों के साथ भरोसेमंद संबंध बनाए रखे हैं. श्रीलंका की आर्थिक और मानवीय संकट के वक्त की गई मदद ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी है, जिसका असर वहां की जनता की सोच में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है.

जयशंकर ने कहा, “अगर मैं इस हॉल में मौजूद लोगों से पूछूं कि आपके हिसाब से किस देश की भारत के बारे में राय सबसे अच्छी है? क्या कोई अंदाज़ा लगाना चाहेगा? यह ‘प्यू’ का एक पोल है. ठीक है, आप पोल के बारे में जानते हैं. खैर, चूंकि आपने जवाब दिया ही है, तो मुझे लगता है, अगर मैं गलत नहीं हूं तो श्रीलंका में भारत के लिए 79% लोगों की राय अच्छी थी. यानी, श्रीलंका के 79% लोग भारत को अच्छी नजर से देखते थे.”

जयशंकर ने श्रीलंका के अपने अनुभव को याद किया
विदेश मंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि श्रीलंका में उनके शुरुआती करियर के दौरान, जब वहां इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) तैनात थी, तब उन्हें वहां काम करने का अनुभव मिला था. उन्होंने कहा, “इस बात ने मुझे सच में बहुत प्रभावित किया क्योंकि अपनी जवानी के दिनों में, मैंने श्रीलंका में तब काम किया था जब वहां इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मौजूद थी. मैंने उस रिश्ते के सबसे मुश्किल दौर देखे हैं. और मेरे लिए, यह सोचना ही बहुत बड़ी बात है कि 79% श्रीलंकाई लोग भारत के बारे में अच्छी राय रखते हैं.”

उन्होंने इस धारणा का खंडन करते हुए उस सर्वे का ज़िक्र किया कि अतीत में भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध ज़्यादा अच्छे थे. उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में हमेशा सहयोग और मुश्किलें, दोनों ही रही हैं. उन्होंने कहा, “मालदीव में एक भारतीय कंपनी को एयरपोर्ट के एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया गया था, और इसकी मुख्य वजह यह थी कि वह एक भारतीय कंपनी थी.”

‘कोई राजनीतिक कल्पना न करें’
बांग्लादेश का ज़िक्र करते हुए, जयशंकर ने अतीत में ढाका में भारतीय आतंकवादियों और अलगाववादियों की मौजूदगी की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा, “इसलिए जब आप कहते हैं कि ‘अरे, पुराने दिनों में पड़ोस अच्छा था’, तो आइए, ऐसी कोई राजनीतिक कल्पना न करें. पड़ोस में भी अपनी-अपनी समस्याएं रही हैं.” जयशंकर ने आगे कहा कि भारत के लिए चुनौती अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों को संभालने में सही संतुलन बनाना है.



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