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Barbatti Farming: कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत मसनोडीह गांव के किसान पप्पू मेहता ने मेहनत और आधुनिक खेती के बल पर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की है. कभी ढिबरा मजदूरी करने वाले पप्पू आज गांव में ही लीज पर जमीन लेकर सब्जी की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं और अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं.
उनकी सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. पप्पू मेहता ने बताया कि उन्होंने 10 कट्ठा जमीन लीज पर लेकर बरबट्टी की खेती शुरू की. खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी की गई. इसके बाद बरबट्टी की बेलों के लिए बांस और तार का मजबूत ढांचा तैयार किया गया ताकि पौधों का बेहतर विकास हो सके और अधिक उत्पादन मिले.
40 हजार की लागत के महीने में एक लाख 20 हजार तक की कमाई उन्होंने बताया कि खेत की तैयारी, बांस और तार लगाने सहित अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 30 हजार रुपये का खर्च आया. वहीं उच्च गुणवत्ता वाले बीज खरीदने में लगभग 10 हजार रुपये की लागत लगी.
यानी शुरुआती निवेश करीब 40 हजार रुपये रहा. पप्पू मेहता के अनुसार बीज रोपाई के लगभग 90 दिन बाद उत्पादन शुरू हो गया. वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन करीब 150 किलो बरबट्टी की उपज मिल रही है. इस ताजी सब्जी की बिक्री कोडरमा के स्थानीय बाजारों में की जा रही है. जहां इसकी अच्छी मांग है.
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उन्होंने बताया कि मौजूदा बाजार भाव के अनुसार उन्हें प्रतिदिन लगभग 4,500 रुपये की आय हो रही है. इस तरह महीने में औसतन 1 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है. बरबट्टी की फसल से अभी कुछ महीनों तक उत्पादन मिलता रहेगा. जिससे उनकी आय लगातार बनी रहेगी.
पप्पू मेहता ने कहा कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और व्यावसायिक फसलों को अपनाएं तो कम जमीन से भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि खेती में मेहनत जरूर है, लेकिन सही योजना और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की जाए तो यह रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकती है.