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पलामू में उद्यान विभाग किसानों को फ्री मशरूम ट्रेनिंग और किट देगा. 180 किसानों और महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा. बिना शुरुआती लागत के ओयस्टर और बटन मशरूम उगा सकते हैं. कम जगह में घर बैठे खेती संभव है. किसान हर माह 6-7 हजार रुपये तक एक्स्ट्रा इनकम कमा सकते हैं.
पलामूः मानसून का सीजन किसानों के लिए सिर्फ खेत में फसल उगाने का समय नहीं, बल्कि घर बैठे अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी लेकर आया है. वहीं मशरूम की खेती कम जगह और कम संसाधनों में शुरू की जा सकती है. खासकर वे किसान जो खेती के साथ अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं और ग्रामीण महिलाएं जो घर से काम करना चाहती हैं, उनके लिए मशरूम उत्पादन बेहतर विकल्प बन सकता है. उद्यान विभाग की योजना के तहत किसानों को मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण के साथ मशरूम किट उपलब्ध कराने की तैयारी है. जिसके जरिए किसानों को बिना शुरुआती लागत के मशरूम उत्पादन सीखने और शुरू करने का अवसर मिलेगा.
180 किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और मशरूम किट
जिला उद्यान पदाधिकारी सावन कुमार ने लोकल18 को बताया कि उद्यान विभाग की योजना के तहत पलामू जिले में 180 किसानों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण और किट देने का लक्ष्य रखा गया है. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी. किट मिलने के बाद किसान अपने घर या उपयुक्त स्थान पर इसका उत्पादन शुरू कर सकेंगे. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि शुरुआती स्तर पर किसानों को उत्पादन शुरू करने के लिए सामग्री जुटाने में अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा. इससे छोटे किसान और ग्रामीण महिलाएं भी इस गतिविधि से आसानी से जुड़ सकती हैं.
किट में उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री
आगे कहा कि मशरूम किट में उत्पादन के लिए जरूरी कई सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें स्ट्रॉ, स्पॉन सहित अन्य आवश्यक सामग्री और प्लास्टिक आदि शामिल होंगे. किसानों को यह भी बताया जाएगा कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल किस तरह करना है और मशरूम को किस वातावरण में तैयार करना बेहतर रहेगा. इस माध्यम से किसने उत्पादन की तकनीक सीख सकेंगे. इससे शुरुआती किसानों को खेती शुरू करने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी.
ओयस्टर और बटन मशरूम का उत्पादन
किसान प्रशिक्षण लेकर अलग-अलग प्रकार के मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं. इनमें ओयस्टर मशरूम और बटन मशरूम प्रमुख विकल्प हैं. हालांकि दोनों की उत्पादन तकनीक और वातावरण की जरूरत अलग होती है, इसलिए प्रशिक्षण के दौरान किसानों को इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी. सही तापमान, नमी, स्वच्छता और उत्पादन तकनीक का ध्यान रखकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. मशरूम की खेती की खासियत यह है कि इसके लिए बड़े खेत की आवश्यकता नहीं होती और इसे घर के आसपास उपलब्ध स्थान पर भी शुरू किया जा सकता है.
हर माह 6-7 हजार तक अतिरिक्त आमदनी
उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन को किसान अतिरिक्त आय के साधन के तौर पर अपना सकते हैं. योजना के तहत प्रशिक्षण और किट मिलने के बाद किसान उत्पादन शुरू कर बाजार में मशरूम बेच सकते हैं. बेहतर उत्पादन और बाजार की उपलब्धता के आधार पर किसान हर माह करीब 6 से 7 हजार रुपये तक की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि वास्तविक कमाई उत्पादन, बिक्री मूल्य, बाजार और उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी. छोटे किसानों के लिए यह खेती पारंपरिक फसल के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है.
महिलाओं के लिए घर से रोजगार का बेहतर विकल्प
बता दें कि मशरूम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए खेत में लगातार काम करने की जरूरत नहीं होती. ग्रामीण महिलाएं घर के आसपास छोटे स्तर पर इसका उत्पादन कर सकती हैं. इससे उन्हें घर की जिम्मेदारियों के साथ आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा. प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखकर धीरे-धीरे इसे व्यवसाय के रूप में भी विकसित कर सकती हैं.
बरसात में घर बैठे कमाई का अवसर
बरसात के मौसम में मशरूम उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का अच्छा विकल्प बन सकता है. कम जगह में उत्पादन, प्रशिक्षण की सुविधा और योजना के तहत मिलने वाली किट इसे छोटे किसानों के लिए आकर्षक बनाती है. जरूरत है तो सही तकनीक सीखने, स्वच्छता का ध्यान रखने और तैयार मशरूम के लिए बाजार तलाशने की. अगर किसान प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करें, तो मशरूम की खेती उनके लिए घर बैठे अतिरिक्त आमदनी और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता बन सकती है.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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