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पश्चिमी सिंहभूम में 100 से अधिक बच्चे मलेरिया पॉजिटिव:86 गांवों में विशेष...




पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच के दौरान विभिन्न आवासीय स्कूलों के 100 से अधिक बच्चे मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। लगातार हो रही बरसात के बीच जिले में मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। राहत की बात यह रही कि अधिकांश बच्चों में मलेरिया के स्पष्ट लक्षण नहीं थे, जिससे समय पर संक्रमण की पहचान कर तत्काल उपचार शुरू किया जा सका। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिवचरण हांसदा ने बताया कि यदि इन बच्चों की समय पर जांच और इलाज नहीं होता, तो वे ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते थे। मिशन उदय M 2.0 के तहत जांच उन्होंने बरसात के मौसम में मलेरिया के तेजी से फैलने के कारण समय पर जांच और दवा के महत्व पर जोर दिया। बढ़ते खतरे को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने ‘मिशन उदय M 2.0’ के तहत जिले के 86 मलेरिया रेड जोन घोषित गांवों में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत टोंटो, सोनुआ, गोइलकेरा, मनोहरपुर, बड़ाजामदा और झींकपानी प्रखंड के गांवों में घर-घर जाकर मलेरिया की जांच की जा रही है। संक्रमित पाए जाने पर तत्काल दवा उपलब्ध कराई जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने गोइलकेरा और मनोहरपुर क्षेत्र का दौरा कर अभियान का निरीक्षण किया और स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने और बुखार आने पर तुरंत जांच कराने की अपील की है। पश्चिमी सिंहभूम देश के मलेरिया प्रभावित प्रमुख जिलों में शामिल है, जिसके कारण विभाग विशेष सतर्कता बरत रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने जांच और सर्विलांस अभियान किया तेज
इधर, पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान और तेज कर दिया है। सोमवार को जिलेभर में 6,878 लोगों की जांच की गई, जिसमें 89 नए संक्रमित मिले। इनमें 67 मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (पीएफ) और 22 मरीज प्लाज्मोडियम वाइवैक्स (पीवी) मलेरिया से संक्रमित पाए गए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 6 जुलाई को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) से 6,505 और स्लाइड टेस्ट से 373 लोगों की जांच की गई। सभी संक्रमितों का इलाज शुरू कर आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि जिले के विभिन्न प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में हाई रिस्क जोन चिह्नित कर सर्विलांस, जांच, उपचार, फॉगिंग और जनजागरूकता अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (आईआरएस) अभियान भी जारी है तथा जरूरत के अनुसार जांच किट और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।



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