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भास्कर न्यूज|गुमला जिला मुख्यालय के रौनियार भवन में 25 अक्टूबर को पिछड़ी जाति मोर्चा की समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उदासन नाग ने की। बैठक में 5, 6 और 7 अक्टूबर को ओबीसी आरक्षण और अधिकारों की मांग को लेकर हुए त्रिदिवसीय आंदोलन की बिंदुवार समीक्षा की गई। इस आंदोलन में मशाल जुलूस, चक्का जाम और धरना-प्रदर्शन शामिल थे। बैठक में वक्ताओं ने कार्यक्रमों में भागीदारी और प्रभावशीलता पर संतोष जताया। आंदोलन के बाद प्रशासन और कामडारा पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी भी दर्ज कराई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कार्यकर्ताओं पर धारा 126 जैसी कार्रवाई मनमानी है। उन्होंने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। बैठक में कहा गया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे लोगों को परेशान करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उदासन नाग ने कहा कि ओबीसी समाज आरक्षण, जातिगत जनगणना और राजनीतिक-सामाजिक भागीदारी की मांगों को लेकर एकजुट है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। बैठक में आगे की रणनीति पर भी निर्णय लिया गया। सर्वसम्मति से कहा गया कि सरकार और प्रशासन ने यदि जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो जिले और प्रमंडल स्तर पर आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। योजना के तहत गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाने, पंचायत स्तर की कमेटियों को मजबूत करने, बड़े स्तर पर अगली आंदोलनात्मक घोषणा की रूपरेखा तय की गई। बैठक में केंद्रीय संरक्षक जगदीश साहू, रामजी यादव, ओबीसी समाज के महासचिव दिलीप नाथ साहू और अहीर सेना के सुदर्शन गोप सहित विभिन्न जिलों और प्रखंडों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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