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पिता बेचते हैं चाय-पकौड़ी, बेटा बनेगा MBBS डॉक्टर; कोडरमा के सत्यम का...


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कोडरमा के सत्यम मोदी ने री-नीट 2026 में 640 अंक लाकर बड़ी सफलता हासिल की है. उनके पिता चाय-पकौड़ी की दुकान चलाते हैं. सत्यम कोटा में रहकर रोज 10-12 घंटे पढ़ते थे. वे संकल्प पूरा कर तीन साल बाद घर लौटे हैं. उन्हें एम्स पटना या देवघर मिलने की उम्मीद है.

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कोडरमा: झुमरी तिलैया शहर के गौशाला रोड निवासी संतोष मोदी के पुत्र सत्यम मोदी ने री-नीट 2026 में शानदार सफलता हासिल की है. संतोष मोदी घर के सामने ही राशन की दुकान और एक छोटा नाश्ते का होटल चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं. जहां वे खुद चाय और पकौड़ी बनाकर लोगों को परोसते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद सत्यम ने अपनी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास के दम पर सफलता की नई मिसाल कायम की है.

पहले प्रयास में नहीं मिली थी सफलता
विशेष बातचीत में सत्यम ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा कोडरमा में हुई. वर्ष 2023 में उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद विज्ञान संकाय में बायोलॉजी विषय चुनने के साथ ही उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना आकार लेने लगा. इसी लक्ष्य को लेकर वे कोटा चले गए और वहीं रहकर नीट की तैयारी शुरू कर दी. सत्यम ने बताया कि वर्ष 2025 में उन्होंने पहली बार नीट परीक्षा दी थी. उस परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक लगभग 36 हजार आई थी. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों का विश्लेषण कर दोगुने उत्साह के साथ तैयारी जारी रखी. आखिरकार वर्ष 2026 की परीक्षा में उन्होंने 720 में से 640 अंक प्राप्त किए. इसके साथ ही उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2321 तथा ओबीसी एनसीएल श्रेणी में 838वीं रैंक हासिल हुई.

स्मार्ट तरीके से करें पढ़ाई 
उन्होंने बताया कि सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान नियमित मॉक टेस्ट और अपनी गलतियों का लगातार विश्लेषण करना रहा. उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को घंटे गिनकर पढ़ाई करने के बजाय स्मार्ट तरीके से पढ़ाई करनी चाहिए. यदि छात्र केवल समय पूरा करने के उद्देश्य से पढ़ते हैं तो उनका ध्यान पढ़ाई से भटक जाता है. जबकि विषय को समझने और सीखने पर ध्यान देने से कम समय में भी बेहतर परिणाम मिलते हैं. सत्यम ने बताया कि कोटा में उन्होंने कोचिंग और सेल्फ स्टडी को मिलाकर प्रतिदिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई की. तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया के उपयोग को पूरी तरह नियंत्रित रखा. वे केवल यूट्यूब और व्हाट्सएप का सीमित उपयोग करते थे. यूट्यूब से उन्हें पढ़ाई से संबंधित वीडियो और कॉन्सेप्ट समझने में मदद मिलती थी. जबकि व्हाट्सएप के माध्यम से कोचिंग संस्थान और शिक्षकों के ग्रुप से अध्ययन सामग्री प्राप्त होती थी.

3 सालों पर घर-परिवार, त्योहार से दूर
उन्होंने बताया कि जब वे कोटा गए थे. तभी यह संकल्प लेकर गए थे कि सफलता हासिल किए बिना घर वापस नहीं लौटेंगे. इसी दृढ़ निश्चय के कारण वे लगातार तीन वर्षों तक घर नहीं आए. इस दौरान परिवार में कई शादी विवाह, त्योहार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रम हुए. लेकिन उन्होंने हर अवसर का त्याग कर अपना पूरा ध्यान केवल पढ़ाई पर केंद्रित रखा. सत्यम ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दिया. उन्होंने कहा कि उनकी रैंक के अनुसार उन्हें एम्स पटना या एम्स देवघर में एमबीबीएस में प्रवेश मिलने की उम्मीद है. उनका सपना एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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