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जंतर-मंतर पर नीट विरोध प्रदर्शन में शामिल पांच छात्र-छात्राओं रिया अहीर, नूतन टोपू, फराह नाज़, भरत बनाईथ और मुस्कान के साथ राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उन्हें ‘संविधान और आईडिया ऑफ इंडिया का रक्षक’ बताया. राहुल ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले इन युवाओं को लाठीचार्ज, धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. वहीं छात्रों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए. किसी ने पैलेट गन से फायर होने का दावा किया, तो किसी ने हिरासत, मारपीट और ‘देशद्रोही’ कहे जाने की बात कही.
जंतर-मंतर पर पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृ्त्व में शामिल पांच छात्र-छात्राओं रिया अहीर, नूतन टोपू, फराह नाज़, भरत बनाईथ और मुस्कान को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. राहुल ने इन युवाओं को ‘संविधान और आईडिया ऑफ इंडिया का रक्षक’ बताते हुए कहा कि इन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और इसके लिए इन्हें प्रताड़ना, लाठीचार्ज और धमकियों का सामना करना पड़ा. प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन सभी छात्रों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए.
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात देश के अलग-अलग राज्यों से आए युवा प्रदर्शनकारियों से हुई है. उन्होंने कहा कि ये हजारों युवाओं की आवाज हैं, जिन्होंने संविधान और शिक्षा व्यवस्था की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन किया. राहुल ने कहा कि इन छात्रों ने किसी तरह की हिंसा नहीं की, लेकिन इसके बावजूद उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है.
राहुल गांधी ने कहा, ‘जब किसी नागरिक के साथ अन्याय होता है तो उसकी रक्षा करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है. यही संविधान और राष्ट्रवाद की असली भावना है. आपने कुछ भी गलत नहीं किया. आपको किसी से माफी मांगने की जरूरत नहीं है. आपने भारत के विचार और संविधान की रक्षा की है.’
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इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल रिया अहिर ने कहा, ‘मैं वही लड़की हूं, जिसने मुंबई में पुलिस की वैन को रोका था और अब मेरे बारे में कई नैरेटिव चलाए जा रहे हैं. मैंने 20 बच्चों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने से रोका था. अब मुझे हैरेस किया जा रहा है, जो कि क्राइम है. मैंने 27 जुलाई को पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन आज 5 अगस्त है और अब तक FIR नहीं हुई है. हालांकि, मुझे खुशी है कि मैं जिन युवाओं के लिए खड़ी हुई, आज वे मेरे साथ खड़े हैं.’
नूतन टोपू झारखंड से आई हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके ऊपर पीछे से पैलेट गन से फायर किया गया. उन्होंने कहा, ‘मैंने खुद देखा था कि हमारी तरफ पैलेट गन लगाकर रखी गई थी. मेरे पीछे मुड़ते ही गन फायर कर दिया गया, जिससे मुझे चोट आई थी. इसके बावजूद मुझे जब भी अन्याय के खिलाफ लड़ने का मौका मिलेगा, मैं जरूर लड़ूंगी.’
उत्तर प्रदेश की फरहा नाज़ ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की. उनका आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उनसे नाम पूछा गया और फिर कहा गया कि ‘इनकी अलग सूची बनेगी, ये देशद्रोही हैं.’ फरहा नाज़ ने इसके साथ ही कहा कोई कुछ भी सोचे, हम देश और अपने हक के लिए आवाज बुलंद करते रहेंगे.
नागपुर से आए भरत बनाईथ ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए. उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद कई घायल छात्रों को एंबुलेंस तक पहुंचाया, लेकिन रास्ते में भी उन्हें रोका गया. भरत का आरोप है कि कई छात्रों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं. भरत ने कहा, ‘हमने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा, तो हमारे साथ इतनी बर्बरता की गई, अगर अमित शाह का इस्तीफा मांग लिया होता, तो शायद गोली मार दी जाती.’
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्रा मुस्कान शर्मा ने कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल थीं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उन पर लाठी चलाई. वह कहती हैं, ‘जब मैं शांति से चल रही थी तो पुलिस ने मुझे क्यों मारा? ये रूल है कि एक मेल ऑफिसर किसी लड़की को नहीं मार सकता, तो एक पुरुष आरएएफ ऑफिसर ने मुझे कैसे मारा? क्यों उसने मेरे पीछे लाठी घुसाने की कोशिश की. उस ऑफिसर को जिसने भी ऐसा करने का ऑर्डर दिया था, अगर वो माफी मांग ले, तो मुझे खुशी होगी.’