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प्रभु का हुआ नेत्रदान, रथ यात्रा आज:एकांतवास से बाहर आए भगवान जगन्नाथ,...




भगवान जगन्नाथ का 15 दिन का एकांतवास खत्म हो गया। बुधवार को नेत्रदान के बाद भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को दर्शन दिए। 108 दीपों से उनकी मंगल आरती की गई। मालपुआ का भोग लगाया गया। अब गुरुवार को शाम पांच बजे रथ यात्रा शुरू होगी। हजारों भक्त धर्मरथ खींचकर भगवान को मौसीबाड़ी पहुंचाएंगे। 25 जुलाई को घुरती रथ यात्रा होगी। इसके बाद भगवान मंदिर में विराजमान हो जाएंगे। इसके साथ ही 10 दिन चलने वाला रथ मेला भी शुरू हो जाएगा। मेले में सुरक्षा के लिए 2000 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। समिति ने भी 100 निजी गार्ड्स को सुरक्षा में लगाया है। मेले की 215 सीसीटीवी कैमरे और चार ड्रोन से निगरानी की जा रही है। रथ पर राज्यपाल-सीएम सहित 13 लोग सवार रहेंगे
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ पर पूजा-अर्चना के समय कुल 13 लोग सवार रहेंगे। इनमें राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस, दो विधायक, सांसद संजय सेठ, पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय, मंदिर के प्रथम सेवक ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव तथा चार पुजारी शामिल हैं। वहीं, रथ के पहियों के पास केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को ही रहने की अनुमति होगी। रथ यात्रा महोत्सव का मिनट टू मिनट कार्यक्रम
सुबह 4 बजे- पूजा आरती
सुबह 5 बजे- श्री विग्रहों का दर्शन
दोपहर 2:00 बजे- दर्शन बंद, सभी विग्रहों का रथ के लिए प्रस्थान
दोपहर 2:30 बजे- सभी विग्रहो को रथ पर बिठाए जाएंगे
दोपहर 2:30 बजे से 3:00 बजे तक- विग्रहों का शृंगार
दोपहर 3:00 बजे- श्री विष्णु लक्षार्चना
दोपहर 4:30 बजे: अष्टकम गीता पाठ
शाम 5:00 से- रथ यात्रा प्रारंभ
शाम 6:00 बजे- रथ मौसीबाड़ी पहुंचेगा
शाम 6:46 से 7:00 बजे- श्री विग्रहों का मौसीबाड़ीग में प्रवेश कराया जाएगा
रात्रि 8:00 बजे- 108 मंगल आरती के बाद शयनम।



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