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Hasanamba Temple Mystery: कर्नाटक के हसनंबा मंदिर में देवी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन यहां मौजूद चार पत्थर की मूर्तियां भी लोगों का ध्यान खींचती हैं. स्थानीय मान्यता है कि ये उन चोरों की मूर्तियां हैं, जो देवी के गहने चुराने आए थे और श्राप के कारण पत्थर बन गए.
कर्नाटक के हसन शहर में स्थित हसनंबा मंदिर परिसर में चार आदमियों की पत्थर की मूर्तियां मौजूद हैं. इस मूर्ति की बड़ी अजब कहानी है. (फोटो: AI)
हसन. भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां लोगों को हैरान कर देती हैं. कुछ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए मशहूर हैं, तो कुछ अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के कारण चर्चा में रहते हैं. कर्नाटक के हसन शहर में स्थित हसनंबा मंदिर भी ऐसा ही एक मंदिर है. यहां देवी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन इस मंदिर की एक और खास बात है, जो लोगों की उत्सुकता बढ़ाती है. मंदिर परिसर में चार आदमियों की पत्थर की मूर्तियां मौजूद हैं. स्थानीय मान्यता के मुताबिक, ये उन चोरों की मूर्तियां हैं, जो कभी देवी के गहने चुराने आए थे.
देवी के गहने चुराने आए थे चार चोर?
हसनंबा मंदिर परिसर में स्थित कल्लप्पना गुड़ी अपनी एक दिलचस्प कहानी के लिए जाना जाता है. स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ियों से एक कथा प्रचलित है कि चार लोग देवी के आभूषण चुराने के इरादे से मंदिर में घुसे थे. कहा जाता है कि इन लोगों की नजर देवी के कीमती गहनों पर थी. वे किसी तरह मंदिर से आभूषण चुराकर ले जाना चाहते थे लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं हो सकी. स्थानीय लोककथा के अनुसार, देवी ने चोरों को ऐसा श्राप दिया कि वे पत्थर में बदल गए. मंदिर में मौजूद चार पत्थर की मूर्तियों को उन्हीं चोरों का प्रतीक माना जाता है. इसी कहानी के कारण कल्लप्पना गुड़ी को लेकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों में खास दिलचस्पी रहती है.
क्या सच में पत्थर बन गए थे चार आदमी?
इस कहानी को सुनकर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या वाकई चार लोग देवी के श्राप से पत्थर बन गए थे? दरअसल, इस घटना की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाणित ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. यह कहानी स्थानीय धार्मिक मान्यता और लोककथा के रूप में प्रचलित है. मंदिर में मौजूद पत्थर की मूर्तियों को लोग इसी कहानी से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, इनके वास्तविक इतिहास और निर्माण के समय को लेकर पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है. इसलिए इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के बजाय मंदिर से जुड़ी पुरानी लोकमान्यता के रूप में देखना ज्यादा सही होगा.
साल में एक बार भक्तों को दर्शन देती हैं हसनंबा देवी
कर्नाटक का हसनंबा मंदिर अपनी एक खास परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां देवी के दर्शन पूरे साल नहीं होते. मंदिर के कपाट आमतौर पर साल में एक बार दिवाली के आसपास सीमित अवधि के लिए खोले जाते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु हसन शहर पहुंचते हैं. भक्त देवी के दर्शन करते हैं और अपनी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. हसनंबा मंदिर को शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां की धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं लंबे समय से लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं.
कल्लप्पना गुड़ी क्यों है खास?
हसनंबा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कल्लप्पना गुड़ी भी आकर्षण का केंद्र है. यहां मौजूद चार पत्थर की मूर्तियों और उनसे जुड़ी चोरों की कहानी मंदिर को एक अलग पहचान देती है. किसी के लिए यह देवी की शक्ति से जुड़ी आस्था का विषय है, तो किसी के लिए यह कर्नाटक की पुरानी लोककथाओं और धार्मिक विरासत का हिस्सा है. हसनंबा मंदिर की पहचान सिर्फ देवी के दर्शन तक सीमित नहीं है. यहां की परंपराएं, मान्यताएं और कल्लप्पना गुड़ी से जुड़ी चार चोरों की कहानी भी इसे खास बनाती हैं. यही वजह है कि मंदिर आने वाले लोग देवी के दर्शन के साथ इस अनोखी कहानी के बारे में जानने में भी दिलचस्पी दिखाते हैं.
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अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
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