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बदलते मौसम में लीची फटने से किसान परेशान, तेज धूप बेमौसम बारिश...


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बदलते मौसम में लीची फटने से किसान परेशान, एक्सपर्ट ने बताया मल्चिंग का उपाय

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Litchi Care In Changing Weather: मई का महीना आते ही बागानों में लीची की मिठास घुलने लगती है. पेड़ों पर लटकती लाल-लाल लीचियां न सिर्फ देखने में खूबसूरत लगती हैं, बल्कि किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया भी होती हैं. लेकिन इस बार मौसम के अचानक बदलते मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कहीं तेज धूप पड़ रही है तो कहीं बेमौसम बारिश हो रही है. इस उतार-चढ़ाव भरे मौसम का सीधा असर लीची की फसल पर देखने को मिल रहा है. जैसे-जैसे लीची पक रही है, वैसे-वैसे उसके फटने की समस्या भी बढ़ती जा रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि लीची अभी पूरी तरह से पकी नहीं होती, लेकिन मौसम के असंतुलन के कारण उसके छिलके पर असर पड़ता है. जब कभी तेज धूप निकलती है और फिर अचानक बारिश हो जाती है, तो फल के अंदर और बाहर का दबाव अलग-अलग हो जाता है.

इस वजह से लीची का छिलका पतला और कमजोर हो जाता है और वह फटने लगता है. फटी हुई लीची न तो बाजार में अच्छी कीमत पर बिक पाती है और न ही ज्यादा दिन तक सुरक्षित रहती है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. इसके अलावा, लीची के फटने का एक बड़ा कारण पोषक तत्वों की कमी भी है. खासकर बोरॉन की कमी होने पर यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.

बोरॉन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो फल के विकास और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी कमी होने पर फल का छिलका कमजोर हो जाता है और वह आसानी से फट सकता है. इसलिए किसानों को चाहिए कि वे समय-समय पर अपने बागानों की मिट्टी की जांच कराएं और जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों की पूर्ति करें.

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इस समस्या से बचाव के लिए सबसे जरूरी है नियमित और संतुलित सिंचाई. खेत में न तो ज्यादा पानी जमा होने देना चाहिए और न ही पूरी तरह सूखने देना चाहिए. मिट्टी में नमी का संतुलन बना रहना बहुत जरूरी है, ताकि फल पर अचानक दबाव न पड़े. इसके साथ ही, बोरॉन युक्त खाद या घोल का छिड़काव करना भी फायदेमंद होता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, 0.2% बोरॉन का घोल बनाकर छिड़काव करने से लीची के फटने की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.इसके अलावा, बागानों में मल्चिंग करना भी एक अच्छा उपाय है. इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और तापमान का असर कम पड़ता है.

तेज धूप से बचाने के लिए पेड़ों के आसपास घास या पुआल बिछाया जा सकता है. साथ ही, जरूरत पड़ने पर हल्की छायादार जाल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिससे फलों पर सीधे धूप का असर कम हो. कुल मिलाकर, लीची की फसल को बचाने के लिए किसानों को थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए.

सही समय पर सिंचाई, पोषक तत्वों का संतुलन और मौसम के अनुसार प्रबंधन करके इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. यदि किसान इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो वे अपनी मेहनत को बर्बाद होने से बचा सकते हैं और अच्छी गुणवत्ता वाली लीची से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.



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