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बरसात में हरे चारे की कमी दूर करने के लिए नेपियर घास सबसे बेहतरीन विकल्प है. जून का महीना इसकी बुआई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. एक बार लगाने पर इससे तीन से चार साल तक हरा चारा मिलता है. इससे पशुओं का दूध उत्पादन भी बढ़ता है. देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने इस संबंध में विस्तार से बताया है.
देवघरः बरसात का मौसम शुरू होने वाला है. ऐसे में किसानों और पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था को लेकर होती है. बारिश के दौरान कई बार खेतों में पानी भर जाने, चारे की फसल खराब होने या समय पर हरा चारा नहीं मिलने से गाय और भैंस के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है. इसका सीधा प्रभाव दूध उत्पादन पर भी देखने को मिलता है. ऐसे में यदि किसान पहले से ही तैयारी कर लें तो बरसात के दिनों में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. हरे चारे के लिए नेपियर घास एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जो कम मेहनत में लंबे समय तक पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध कराता है.
क्या कहते है कृषि विशेषज्ञ?
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि नेपियर घास दुधारू पशुओं के लिए बेहद लाभदायक चारा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान यदि एक बार इसकी खेती कर दें तो अगले तीन से चार वर्षों तक लगातार हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं. बार-बार बीज बोने या खेत तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती. यही कारण है कि आजकल बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. विशेष रूप से जून का महीना नेपियर घास लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय मौसम और नमी दोनों इसके विकास के लिए अनुकूल रहते हैं.
जून महीने में कर दे बुवाई
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार नेपियर घास की फसल लगभग 30 दिनों में तैयार हो जाती है. यदि किसान जून महीने में इसकी बुआई कर देते हैं तो बरसात शुरू होने से पहले ही पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध हो जाता है. इसके बाद चाहे कितनी भी बारिश क्यों न हो, पशुपालकों को हरे चारे की कमी नहीं होती. यही वजह है कि इसे बरसात के मौसम का सबसे भरोसेमंद चारा माना जाता है. यह घास तेजी से बढ़ती है और बार-बार कटाई के बाद भी दोबारा तेजी से तैयार हो जाती है.
इस घास में प्रोटीन पाया जाता है
पोषण की दृष्टि से भी नेपियर घास काफी समृद्ध मानी जाती है. इसमें लगभग 7 से 12 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा कैल्शियम और फास्फोरस जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं. नियमित रूप से इस घास को खिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. कई मामलों में दूध उत्पादन में 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है. यही कारण है कि डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए यह घास काफी लाभकारी साबित हो रही है.
कुछ बातों का रखे ध्यान
नेपियर घास की एक और विशेषता यह है कि इसकी खेती लगभग हर प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है. किसानों को इसके लिए किसी विशेष जमीन की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि अधिक पानी जमा होने से पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जहां पानी आसानी से निकल सके. इसके अलावा प्रत्येक कटाई के बाद खेत में सिंचाई करना भी जरूरी होता है, जिससे घास तेजी से दोबारा बढ़ सके और उत्पादन लगातार बना रहे.
हर 25 दिन मे कर सकते है कटाई
विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपियर घास की कटाई हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर की जा सकती है. जितनी नियमित रूप से इसकी कटाई होगी, उतनी ही तेजी से नई घास निकलती रहेगी. कम लागत, आसान देखभाल और लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता के कारण नेपियर घास आज पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है. ऐसे में जो किसान अपने पशुओं के लिए सालभर पौष्टिक हरे चारे की व्यवस्था करना चाहते हैं, उनके लिए जून महीने में नेपियर घास की खेती शुरू करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.