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बरेली में करीब एक हजार वर्ष पूर्व बाबा अलखनाथ के आगमन के बाद बरेली को नाथ नगरी के रूप में नई पहचान मिली. हालांकि वनखंडी नाथ महादेव मंदिर का इतिहास इससे भी कहीं अधिक प्राचीन माना जाता है. स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्वयंभू शिवलिंग महाभारत काल से स्थापित है.कहा जाता है कि पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री माता द्रौपदी स्वयं यहां भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक करने आती थीं.पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भी इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा किए जाने की मान्यता प्रचलित है.
बरेली: सावन मास की शुरुआत के साथ ही शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. उत्तर प्रदेश का बरेली, जिसे पौराणिक काल में पांचाल नगरी और आज नाथ नगरी के नाम से जाना जाता है. अपने प्राचीन शिव मंदिरों के लिए विशेष पहचान रखता है. इन्हीं में से एक है जोगी नवादा स्थित श्री बाबा वनखंडी नाथ महादेव मंदिर, जिसकी मान्यताएं महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं.
बाबा अलखनाथ से मिली पहचान
वरिष्ठ इतिहासकार डॉक्टर राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि करीब एक हजार वर्ष पूर्व बाबा अलखनाथ के आगमन के बाद बरेली को नाथ नगरी के रूप में नई पहचान मिली. हालांकि वनखंडी नाथ महादेव मंदिर का इतिहास इससे भी कहीं अधिक प्राचीन माना जाता है. स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्वयंभू शिवलिंग महाभारत काल से स्थापित है.कहा जाता है कि पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री माता द्रौपदी स्वयं यहां भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक करने आती थीं.पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भी इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा किए जाने की मान्यता प्रचलित है.
गंगाजल से करते हैं जलाभिषेक
सावन मास में इस प्राचीन मंदिर की भव्यता और आस्था कई गुना बढ़ जाती है. दूर-दूर से आने वाले कांवड़िए और श्रद्धालु गंगाजल से जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.भक्तों का विश्वास है.कि सच्चे मन से यहां की गई पूजा और दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. मंदिर के आचार्य श्याम मोहन शास्त्री बताते हैं.कि यह अत्यंत प्राचीन और सिद्ध पीठ है, जहां अनादि काल से महाअभिषेक की परंपरा चली आ रही है. उनका कहना है कि भगवान शिव कल्याण के प्रतीक हैं और श्रावण मास में जलाभिषेक तथा दुग्धाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
वहीं स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है.कि इस स्वयंभू शिवलिंग का स्वरूप दिन में अलग-अलग समय पर बदलता दिखाई देता है. जिसे भक्त भगवान शिव की दिव्य लीला मानते हैं. करीब पांच दशकों से मंदिर में दर्शन करने आ रहे श्रद्धालु राजेश पांडे बताते हैं कि उन्होंने इस धाम में अनेक लोगों की मनोकामनाएं पूरी होते देखी हैं. वहीं चंदपुर से पहुंचे एक अन्य भक्त का कहना है.कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस मंदिर में आस्था के साथ आती रही हैं. और उन्हें यहां हमेशा आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है.
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