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Ballia News: बलिया जिला अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ नाम की रह गई है. सड़क हादसे में एक घायल को उसके परिजन जब अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर ही नहीं थे. उनके मुताबिक करीब 45 मिनट तक वो अस्पताल का हर कोना-कोना छान मारे. मगर घायल मरीज की जान बचाने वाला वहां कोई नहीं था. आखिरकार सिस्टम के आगे जिंदगी हार गई और उसकी मौत हो गई.
बलिया: इन दिनों जिला अस्पताल बलिया की स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो गई है. हॉस्पिटल से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. आपको बताते चलें कि सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवक को जब सबसे ज्यादा जरूरत इलाज की थी. तब ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर ही नहीं थे. जबकि कागज में दो डॉक्टर ड्यूटी पर थे. परिजन मदद की गुहार लगाते रहे.
अस्पताल के गलियारों में दौड़ते रहे. लेकिन सिस्टम कुंभकर्णीय नींद में था. लगभग 45 मिनट तक जिंदगी सांसों के सहारे लड़ती रही और आखिरकार अंत में युवक ने दुनिया को अलविदा कह दिया और पूरा माहौल ही शोक में बदल गया. हालांकि इससे पहले परिजन अस्पताल के कई दरवाजे खटकाए. लेकिन शायद सिस्टम ही मर गई थी.
माल्देपुर निवासी अतुल कुमार ने कहा कि 40 वर्षीय मृतक अविनाश कुमार उनके भाई थे जो सुबह सागरपाली से माल्देपुर की ओर आ रहे थे. इसी दौरान अचानक एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी जो खनन के लिए जा रही थी. हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर का पहिया उनके ऊपर से गुजर गया. गंभीर हालत में परिजन अविनाश को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे. लेकिन वहां इलाज के लिए भटकते रहे. मगर इलाज नहीं मिला.
अतुल ने आगे कहा कि अविनाश अस्पताल पहुंचने के बाद भी सांस ले रहे थे. परिवार के लोग लगातार डॉक्टरों को खोज रहे थे. अधिकारियों से गुहार लगाते रहे थे. लेकिन 45 मिनट तक कोई चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा. परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी. परिजन सीएमओ कार्यालय में भी गए थे. लेकिन वहां कोई नहीं था.
अविनाश की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और जिला अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की गई. हालात बिगड़ते देख पुलिस बल को भी मौके पर बुलाना पड़ा. बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चरी भेज दिया गया है.
इसके बाद तो अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया और अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उस समय ड्यूटी पर डॉक्टर ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध नहीं थे. मामले की जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच किसी परिवार की उजड़ी दुनिया को वापस लौटा सकती है? इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है.
एक ओर अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर समय पर इलाज न मिलने से लोगों की जान जा रही है. अविनाश अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए है. सवाल न केवल एक मौत की है, बल्कि उस सिस्टम की जवाबदेही भी है. जिसकी लापरवाही के कारण एक परिवार का सहारा भगवान को प्यारा हो गया है. क्या इसके आंगन की खुशियां जिम्मेदार लौटा पाएंगे.
जिला अस्पताल बलिया के सीएमएस डॉ. एसके यादव ने कहा कि उक्त मामले में जांच टीम गठित कर दी गई है. हालांकि युवक के मौत की खबर बहुत ही दु:खद है. जिला अस्पताल परिसर के ट्रामा सेंटर में दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी. एक डॉक्टर मनोज कुमार थे (कलरा वार्ड वाले नहीं ट्रामा सेंटर वाले हैं) और दूसरा डॉक्टर ट्रामा सेंटर में रजनीश की ड्यूटी लगी हुई थी. अगर यह मौके पर नहीं थे, तो इनकी लापरवाही है. जांच होने के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें