भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

बांबे हाईकोर्ट से चुनाव आयोग को झटका, SIR में कटे 6 नाम...


होमताजा खबरदेश

बांबे HC से चुनाव आयोग को झटका, SIR में कटे 6 नाम तुरंत शामिल करने के आदेश

Last Updated:

बांबे हाईकोर्ट ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग को झटका देते हुए गोवा के एक परिवार के छह सदस्यों के नाम 10 दिन में मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया है. एसआईआर के दौरान इन सभी के नाम सूची से काट दिए गए थे. हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की मोहल्लत देने से भी इनकार कर दिया.

बांबे HC से चुनाव आयोग को झटका, SIR में कटे 6 नाम तुरंत शामिल करने के आदेशZoom

बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग एसआईआर ने कटे 6 नामों को शामिल करने का आदेश दिया है. फाइल फोटो

केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) को बांबे हाईकोर्ट से झटका लगा है. बांबे हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग को निर्देश दिया कि वह गोवा के एक परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में शामिल करे. एसआईआर में ये नाम काट दिए गए थे. हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने यह आदेश दिया है. दरअसल, परिवार ने पता बदलने की जानकारी देने के लिए फॉर्म-8 भरा था, लेकिन आयोग ने उसे स्वीकार नहीं किया. इसके बाद परिवार के सभी छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हट गए.

10 दिन में नाम जोड़ने का आदेश

यह मामला गोवा की सांता क्रूज विधानसभा सीट का है. याचिकाकर्ता परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. परिवार का कहना था कि उन्होंने उसी विधानसभा क्षेत्र में अपना घर बदला था. इसकी जानकारी देने के लिए बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ के कहने पर फॉर्म-8 भी जमा किया था. इसके बावजूद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. परेश सालगांवकर के वकील विवेक रोड्रिग्स के मुताबिक हाईकोर्ट की जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और अमित जामसांडेकर की पीठ ने चुनाव आयोग को सभी छह नाम 10 दिन के भीतर मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया.

1995 से वोट डाल रहे थे परेश

याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि परेश सालगांवकर 1995 से लगातार मतदान कर रहे थे. घर बदलने के बाद उन्होंने पता अपडेट कराने के लिए फॉर्म-8 जमा किया था. इसके बावजूद उनका और परिवार के पांच अन्य सदस्यों का नाम सूची से हटा दिया गया. परिवार ने चुनाव आयोग के सामने अपील भी की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली. इसके बाद सितंबर में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई. 28 सितंबर से इस मामले की सुनवाई शुरू हुई.

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट जाने की लगाई गुहार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील गौरिश अग्नि ने फैसले पर रोक लगाने की मांग की. आयोग चाहता था कि सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती देने तक इस पर अमल न किया जाए. हालांकि, हाईकोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी. पीठ ने कहा कि आदेश पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि यह मतदाता सूची में याचिकाकर्ताओं को शामिल करने से जुड़ा मामला है. इसलिए आयोग की रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.

एसआईआर में सॉफ्टवेयर पर भी उठे सवाल

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे. अदालत ने पूछा था कि जब परिवार ने पता बदलने के लिए फॉर्म-8 जमा किया तो उसे स्वीकार क्यों नहीं किया गया? क्या किसी सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामी कानून से ऊपर हो सकती है? अदालत ने यह भी कहा था कि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे सुनवाई का मौका मिलना चाहिए.

चुनाव आयोग का तर्क था कि एसआईआर में मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की जाती है. ऐसे में जिन लोगों का नाम मसौदा सूची में नहीं है, उन्हें अंतिम सूची में शामिल होने के लिए फॉर्म-6 भरना होगा. लेकिन परिवार का कहना था कि वे पहले से पंजीकृत मतदाता हैं, इसलिए नए मतदाता के तौर पर फॉर्म-6 भरना गलत होगा. अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश से आयोग को 10 दिन में परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में बहाल करने होंगे.

About the Author

संतोष कुमार

पत्रकारिता की दुनिया में करीब 23 साल का अनुभव. देश-दुनिया से लेकर कारोबार तक की खबरों पर लगातार नजर. खबर को सिर्फ सूचना के तौर पर नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी कहानी और उसके असर के साथ समझने की कोशिश. यही पहचान है…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top