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देश में स्थिति पुराने मठ-मंदिरों का अपना इतिहास और परंपरा है. इसी तरह देशभर में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग में से एक देवघर में स्थित है जिसे बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से पहचाना जाता है. यहां की एक अनोखी मान्यात है कि यहां मंदिर के गर्भगृह में पहुंचने पर लोगों का मूड बदल जाता है. उन्हें गुस्सा आने, बेचैनी महसूस होने लगती है.
देवघर: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथधाम है. सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथधाम की रौनक देखते ही बनती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए यहां बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. बैद्यनाथ मंदिर सिर्फ अपनी धार्मिक मान्यता और कांवड़ यात्रा के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं और मान्यताएं भी हैं, जो इसे दूसरे ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान देती हैं. इन्हीं में से एक मान्यता मंदिर के गर्भगृह से जुड़ी हुई है.
क्या कहते हैं तीर्थपुरोहित
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के इस खास रहस्य के बारे में विश्वसनीय जानकारी जानने के लिए लोकल 18 ने बैद्यनाथधाम के तीर्थपुरोहित से बातचीत की. तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह से जुड़ी एक विशेष धार्मिक मान्यता है. उनके अनुसार, गर्भगृह के अंदर पहुंचने के बाद कई बार श्रद्धालुओं और तीर्थपुरोहितों के स्वभाव में अचानक बदलाव देखने को मिलता है. यहां लोगों को जल्दी गुस्सा आने, बेचैनी महसूस होने या आपस में उलझन जैसी स्थिति बनने की बात कही जाती है. हालांकि, इसे वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है.
रावण के द्वारा स्थापित किया शिवलिंग
तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार, इस मान्यता का संबंध रावण और बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि रावण भगवान शिव के परम भक्त थे और उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था. रावण भगवान शिव का शिवलिंग अपने साथ लेकर लंका जाना चाहते थे. इसी यात्रा के दौरान शिवलिंग देवघर की धरती पर स्थापित हो गया और इसके बाद वह यहां से दोबारा नहीं उठ सका. इसी वजह से बाबा बैद्यनाथधाम को रावण से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं के लिए भी जाना जाता है.
रावण अपना गुस्सा यहीं छोड़ गया
मान्यता के अनुसार, जब रावण शिवलिंग को यहां से दोबारा नहीं उठा सका तो उसे बहुत क्रोध आया. कहा जाता है कि क्रोध में रावण ने अपने अंगूठे से शिवलिंग को दबा दिया. इसी कारण बाबा बैद्यनाथ के शिवलिंग पर अंगूठे के निशान की मान्यता भी बताई जाती है. यही वजह है कि इस ज्योतिर्लिंग को कुछ धार्मिक परंपराओं में रावणेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जोड़ा जाता है.
तीर्थपुरोहित का कहना है कि धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण अपने क्रोध का प्रभाव भी यहीं छोड़ गया था. इसी वजह से गर्भगृह के अंदर जाने वाले श्रद्धालुओं और वहां पूजा कराने वाले तीर्थपुरोहितों को कभी-कभी बेचैनी, झुनझुनाहट, उत्तेजना या जल्दी गुस्सा आने जैसी अनुभूति होने की बात कही जाती है. सावन के महीने में जब गर्भगृह में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, तब इस तरह की मान्यताओं को लेकर लोगों में और भी अधिक चर्चा होती है.
देश के प्रमुख स्थलों मे से एक है बाबा बैद्यनाथ धाम
हालांकि, बाबा बैद्यनाथ मंदिर से जुड़ी इन बातों को धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यता के रूप में समझना जरूरी है. इनके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण होने का दावा नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि बैद्यनाथ धाम की खासियत सिर्फ यहां आने वाली भीड़ या कांवड़ यात्रा तक सीमित नहीं है. मंदिर की प्राचीन परंपराएं, पौराणिक कथाएं और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था मिलकर इसे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देती हैं.
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