साथ ही राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीपीपी मॉडल पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) सेंटर स्थापित करने पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने पलामू, गिरिडीह, रामगढ़, गुमला, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा और साहिबगंज में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर की योजना जल्द लागू करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी शिक्षा केवल संस्थान खोलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अगले 15 दिनों के भीतर झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पूरी तरह कार्यरत करने का निर्देश दिया। रोजगारपरक कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को भी इसी अवधि में सक्रिय करने को कहा। वर्ष 2026-27 से राज्य के विश्वविद्यालयों में लाइव ऑनलाइन क्लास शुरू करने की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया। विभाग ने बताया कि इसकी पायलट शुरुआत झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और बीबीएमके धनबाद से होगी। जुपमी अब उच्च शिक्षा के अधीन होगा: बैठक में झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (जुपमी) को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन लाने पर सहमति बनी। यहां बैचलर ऑफ प्लानिंग, मास्टर ऑफ प्लानिंग और एमबीए इन इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा सभी राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों को झारखंड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और सरकारी प्रौद्योगिकी महाविद्यालयों को बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। इनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल डिजाइन, लॉजिस्टिक्स एंड शिपिंग समेत उभरती तकनीकों के पाठ्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने, छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने तथा आईआईटी-एनआईटी की तर्ज पर बीआईटी और जेआईटी जैसे संस्थानों के संचालन के लिए नई सरकारी सोसाइटी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने अगले तीन महीने में उच्च शिक्षा के लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों की कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा।
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