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बोकारो से चलने वाली बसों का बढ़ा किराया:रांची का नॉन-एसी किराया 250...




बोकारो में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा है। ईंधन के दाम बढ़ने से बसों का किराया बढ़ा दिया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और छोटे व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बोकारो से रांची मार्ग पर किराए में अंतर देखा जा रहा है। यात्री ईबु उल्लाह ने बताया कि सरकारी वातानुकूलित 2×2 बसों में 300 रुपए किराया लिया जा रहा है, जबकि निजी बसें इसी रूट पर 350 रुपए वसूल रही हैं। उन्होंने एक ही मार्ग पर किराए में इस असमानता पर सवाल उठाया। बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं निजी बस कंडक्टर मोहम्मद अशरफ ने किराए में वृद्धि का कारण डीजल की बढ़ती कीमतें बताईं। उन्होंने कहा कि परिचालन लागत बढ़ने के कारण बोकारो-रांची मार्ग पर प्रति यात्री 50 रुपए किराया बढ़ाना पड़ा है। अशरफ के अनुसार, बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर बसें चलाना संभव नहीं था। टाटा रूट के टिकट काउंटर संचालक मोफीज उद्दीन ने जानकारी दी कि टाटा, गोड्डा, साहिबगंज और ललमटिया जैसे कई अन्य मार्गों पर भी किराए में 50 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन और बस संचालकों को मिलकर एक समान किराया दर निर्धारित करना चाहिए, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। धनबाद और रामगढ़ रूटों पर भी किराए में वृद्धि दर्ज की गई है। टिकट कंडक्टर मोहम्मद हुसैन के मुताबिक, रामगढ़ का नॉन-एसी किराया 150 रुपए से बढ़कर 180 रुपए हो गया है। इसी तरह, रांची का नॉन-एसी किराया 250 रुपए से बढ़ाकर 280 रुपए कर दिया गया है। बोकारो के निवासियों ने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन किराए की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता के जीवन और घरेलू बजट पर गंभीर असर पड़ेगा।



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