भारत सरकार और अमेरिकी लॉबिंग फर्मों के बीच संपर्क को लेकर सामने आई रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय (MEA) ने भ्रामक बताया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में विदेशी दूतावासों और अन्य संस्थाओं के लिए लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लेना सामान्य प्रक्रिया है. MEA के मुताबिक, वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास 1948 से ही ऐसी कंपनियों की सेवाएं लेता रहा है और इससे जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं.
मंत्रालय ने अमेरिकी लॉबिंग फर्म मर्करी पब्लिक अफेयर्स LLC (Mercury Public Affairs LLC) की भूमिका पर भी अलग से सफाई दी. यह फर्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक मामले में चर्चा में आई थी. MEA ने कहा कि मर्करी पब्लिक अफेयर्स की ओर से दाखिल दस्तावेज में साफ तौर पर जिक्र है कि फर्म ने केवल X पर पोस्ट को प्रसारित किया था.
व्हाइट हाउस के अधिकारियों से कराई थीं आठ फोन कॉल
यह पूरा मामला अमेरिकी कानून फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल एक खुलासे के बाद चर्चा में आया. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW पार्टनर्स LLC ने मई और जून 2026 के दौरान भारतीय सरकारी प्रतिनिधियों और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आठ फोन कॉल की व्यवस्था कराई थी.
यह फर्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी जेसन मिलर के नेतृत्व में काम कर रही थी. FARA के तहत दाखिल दस्तावेज में इन फोन कॉल को भारत सरकार की ओर से की गई ‘राजनीतिक गतिविधियों’ का हिस्सा बताया गया था. इन बातचीत के लिए जिन अमेरिकी अधिकारियों के नाम सामने आए, उनमें वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर माइकल नीडम और अंडर सेक्रेटरी फॉर टेररिज्म एंड फाइनेंशियल इंटेलिजेंस जीन लैंग शामिल थे.
रिपोर्ट के अनुसार, ये फोन कॉल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले हुई थीं. हालांकि, दस्तावेज में यह नहीं बताया गया कि इन बातचीत के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई या उनसे कोई खास नतीजा निकला था या नहीं.
हर महीने 1.5 लाख डॉलर का पेमेंट, जून में खत्म हुआ समझौता
रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में SHW पार्टनर्स के साथ समझौता किया था. अप्रैल 2026 में इस अनुबंध को एक और साल के लिए बढ़ाया गया. इस व्यवस्था के तहत फर्म को हर महीने 1.5 लाख डॉलर का भुगतान किया जा रहा था.
यह समझौता 23 जून को समाप्त हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक, जेसन मिलर के ट्रंप प्रशासन में ‘स्पेशल गवर्नमेंट एम्प्लॉयी’ के तौर पर शामिल होने के बाद यह व्यवस्था खत्म हुई. FARA दस्तावेज में भारत सरकार को फर्म का क्लाइंट और भारत-अमेरिका संबंधों को आठ फोन कॉल का विषय बताया गया था.
मर्करी पब्लिक अफेयर्स का अलग अनुबंध, ट्रंप की पोस्ट से जुड़ा मामला
इस मामले में मर्करी पब्लिक अफेयर्स LLC का नाम भी सामने आया था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस फर्म को अलग से नियुक्त किया गया था और इसके लिए हर महीने 75 हजार डॉलर का भुगतान किया जा रहा था.
फर्म का नाम जून में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सोशल मीडिया पोस्ट के संदर्भ में आया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी. इस मामले में दाखिल FARA दस्तावेज का हवाला देते हुए रिपोर्ट में फर्म की भूमिका का जिक्र किया गया.
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपनी सफाई में कहा कि मर्करी पब्लिक अफेयर्स की फाइलिंग में उसकी भूमिका केवल X पर पोस्ट को प्रसारित करने तक बताई गई है.
MEA ने यह भी दोहराया कि अमेरिकी लॉबिंग फर्मों की सेवाएं लेना कोई नई व्यवस्था नहीं है. भारतीय दूतावास दशकों से ऐसी कंपनियों के साथ काम करता रहा है और इससे संबंधित जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद है.