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मकान का सूचीकरण-गणना शुरू, पूछेंगे 33 सवाल




झारखंड में राष्ट्रीय जनगणना का पहला चरण 16 मई से शुरू हो गया है। इसमें राज्यभर में मकान का सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) एवं आवास गणना की जा रही है। यह कार्य 16 जून तक चलेगा। जनगणना कर्मी (प्रगणक एवं पर्यवेक्षक) घर-घर जाकर एचएलओ ऐप में निर्धारित कुल 33 प्रश्नों के आधार पर जानकारी संकलित करेंगे। जिसमें मकानों की स्थिति, परिवार में सदस्यों की संख्या, पेयजल, शौचालय, बिजली, इंटरनेट, रसोई गैस, आवास की गुणवत्ता जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत गणना होगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य की वास्तविक जरूरतों के आधार पर विकास योजनाओं को तैयार करना है। क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना
जनगणना का यह चरण सरकारी योजनाओं से जुड़ा हुआ है। इसी डेटा पर भविष्य में नई पेयजल योजनाएं, बिजली आपूर्ति विस्तार, शहरी आवास योजना, ग्रामीण सड़क और शौचालय योजना आदि का विस्तार होगा। {प्रगणक को आपके आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, बैंक पासबुक या जमीन के कागजात देखने का कोई अधिकार नहीं है। अगर मांगे, तो मना कर दें। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जान-बूझकर गलत जानकारी देना कानूनी रूप से गलत है। प्रगणक द्वारा घर पर लिखे जनगणना नंबर या लगाए गए स्टीकर को जनगणना की पूरी प्रक्रिया (दोनों चरण) समाप्त होने तक नहीं मिटाएं और न ही उसके साथ छेड़छाड़ करें। प्रगणक के घर आने पर सबसे पहले उनका आधिकारिक पहचान पत्र मांगें और आईडी कार्ड पर दिए गए क्यू-आर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन करके उनकी सत्यता जांच सकते हैं। प्रगणक के 33 सवालों के सही जवाब दें। यह डेटा भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आपने स्व-गणना पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन जानकारी पहले ही भर दी है, तो प्रगणक को अपना यूनिक एसई आईडी दिखाएं।



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