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जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मामले में परीक्षा का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर व अधिकृत प्रतिनिधि मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी पर सीआईडी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीआईडी ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मनोज तिवारी से जुड़ी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है। सीआईडी अब मनोज तिवारी को एक सप्ताह की रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है। टीम उस पर लगे सभी आरोपों पर उससे सवाल-जवाब करेगी। सीआईडी को मिली शिकायत के अनुसार उस पर संगठित परीक्षा सिंडिकेट चलाने, ओएमआर शीट बदलने, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में छेड़छाड़ और अभ्यर्थियों से सौदेबाजी कर करोड़ों रुपए ऐंठने के गंभीर आरोप हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी का फर्जी लाभ लेने वाला मनोज तिवारी आज करोड़ों रुपए की अचल संपत्तियों का मालिक है। अब मामले पर सीआईडी की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जानिए कैसे होता गया मनोज तिवारी विभिन्न परीक्षाओं में पास…
झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 : इस अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा में परीक्षा संचालन करने वाली नोडल एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड का मार्केटिंग मैनेजर और अधिकृत प्रतिनिधि होने के बावजूद मनोज तिवारी ने अनुक्रमांक 1237696 से स्वयं परीक्षा दी। उसने परीक्षा में धांधली और गड़बड़ी कर पूरे झारखंड राज्य में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (अंग्रेजी विषय) : 19 जून, 2024 को प्रकाशित परीक्षाफल के अनुसार, अंग्रेजी विषय की सीधी भर्ती (नियमित रिक्ति) के तहत अनारक्षित श्रेणी में मनोज कुमार तिवारी (पिता- सुखदेव तिवारी) ने अनुक्रमांक 10309146 पर सफलता प्राप्त की। इसके पश्चात स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (माध्यमिक शिक्षा निदेशालय) के आदेश (ज्ञापांक 1907 दिनांक 15 जुलाई 2024) के तहत उसका पदस्थापन +2 उच्च विद्यालय सिमरा (देवघर) में करते हुए उसे रांची के स्कूल आर. मित्रा जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में प्रतिनियुक्त दिखाया गया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी लिखित परीक्षा-2023 : स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) के पदों पर भर्ती के लिए जेपीएससी द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में भी मनोज तिवारी ने अनुक्रमांक 23180018 के माध्यम से खुद को सफल प्रत्याशियों की सूची में शामिल कर लिया।
वन क्षेत्र पदाधिकारी (प्रारंभिक) परीक्षा-2024 : जेपीएससी द्वारा आयोजित वन क्षेत्र पदाधिकारी (एफआरओ) की प्रारंभिक परीक्षा में भी मनोज तिवारी ने अनुक्रमांक 24400147 का इस्तेमाल कर खुद को उत्तीर्ण घोषित करवाया। इस परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर ओएमआर शीट में हेरफेर और रंगाई करने का आरोप उसपर है।
सहायक वन संरक्षक (प्रारंभिक) परीक्षा-2024 : जेपीएससी द्वारा आयोजित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के तहत सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) के पद के लिए ली गई प्रारंभिक परीक्षा में मनोज तिवारी ने अपनी ही कंपनी की पहुंच और तकनीकी नियंत्रण का दुरुपयोग करते हुए अनुक्रमांक 24300086 के जरिए फर्जी तरीके से सफलता प्राप्त कर ली। अभय का भाई व पत्नी भी बने अधिकारी इसकी भी सीआईडी कर रही जांच:
सीआईडी को जांच के दौरान जानकारी मिली है कि जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में अभय तिवारी के भाई और पत्नी ने भी सफलता हासिल की है। सीआईडी की टीम जांच कर रही है कि क्या यह बात सही है। अगर पुष्टि होती है कि दोनों को सफलता मिली है तो इनकी नियुक्ति पर भी तलवार लटक सकती है। अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट जमा करा लेता था
अभ्यर्थी पैसे देकर मुकरने न पाएं या किसी एजेंसी के पास न जाएं, इसके लिए मनोज तिवारी और उसके सहयोगी अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, रद्द चेक, हस्ताक्षरित कोरे स्टाम्प पेपर अपने पास जमा करा लेते थे।
35-40 करोड़ की अवैध कमाई का अनुमान : जानकारी के अनुसार मनोज कुमार तिवारी दो परीक्षाओं से 35 से 40 करोड़ रुपए तक की अवैध कमाई का अनुमान लगाया गया है, जबकि पूरा घोटाला 60 से 80 करोड़ रुपए का हो सकता है। अब सीआईडी ने इसकी जांच शुरू कर दी है। मनी ट्रेल मिला तो पीएमएलए के तहत कस सकता है ईडी का शिकंजा : कानूनी विशेषज्ञों और मामले के तथ्यों के अनुसार, यदि सीआईडी की जांच में अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए नकद या चेक के जरिए लेने की बात साबित हो जाती है, तो सीआईडी इन तथ्यों को अपनी आरोप पत्र में शामिल करेगी। सीआईडी की चार्जशीट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इस मामले में सीधी एंट्री हो सकती है।
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