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मिर्जापुर जिले में चुनार का मिट्टी उद्योग अति प्राचीन है. यहां पर मिट्टी की मूर्तियां व सजावटी सामान सहित अन्य चीज तैयार की जाती है, जिनकी डिमांड देसी ही नहीं बल्कि भी विदेशों में है. चुनार में मुगल काल में मिट्टी के सामान बनने शुरू हुए थे. मिट्टी की मूर्तियां सहित अन्य सामानों को पहले नाव व खच्चर की मदद से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था, जहां भारी संख्या में कारीगर कारोबार से जुड़े हुए थे
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में चुनार का मिट्टी उद्योग अति प्राचीन है. यहां पर मिट्टी की मूर्तियां व सजावटी सामान सहित अन्य चीज तैयार की जाती है, जिनकी डिमांड देसी ही नहीं बल्कि भी विदेशों में है. चुनार में मुगल काल में मिट्टी के सामान बनने शुरू हुए थे. मिट्टी की मूर्तियां सहित अन्य सामानों को पहले नाव व खच्चर की मदद से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था, जहां भारी संख्या में कारीगर कारोबार से जुड़े हुए थे. समय के साथ बदलाव आया, चीजें बदली, लेकिन आज भी चुनार का पॉटरी उद्योग प्राचीन काल को जीवंत किए हुए हैं. लाल मिट्टी के साथ ही यहां पर चीनी मिट्टी व प्लास्टर ऑफ पेरिस के द्वारा भी सामानों का निर्माण किया जा रहा है, जिसके बाजार में खूब डिमांड है.
मुगल काल से ही चुनार की मिट्टी है खास
चुनार पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि चुनार में मुगल काल के दौर में मिट्टी के सामानों का निर्माण शुरू हुआ था. यहां पर पहले प्राचीन विधि से सामानों का निर्माण किया जा रहा था. प्राचीन समय में यहां पर जो सामान तैयार किए जाते थे, उसे गंगा नदी के माध्यम से बड़ी-बड़ी नाव की मदद से वाराणसी, कोलकाता, कानपुर व उत्तराखंड सहित अन्य स्थानों पर ले जाया जाता था. उन स्थानों से सामानों को घोड़े इत्यादि की मदद से अन्य स्थानों पर पहुंचाएं जाते थे चुनार का यह कारोबार अति प्राचीन है, जिससे काफी संख्या में परिवार जुड़े हुए हैं. आजादी के बाद भी सरकार की ओर से इस पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां इस कारोबार को लेकर सरकार के द्वारा कॉमन फैसिलिटी सेंटर का भी निर्माण कराया गया.
कॉमन फैसिलिटी सेंटर का निर्माण
अवधेश वर्मा ने बताया कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनने के बाद यहां पर लाल मिट्टी, चीनी मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों का निर्माण किया जाने लगा. इसके साथ ही कप प्लेट व सजावट के सामान, पत्थरों की मूर्तियां सहित किचन से जुड़े हुए सामान भी बनाए जाने लगे. आज भी चुनार के प्राचीन मिट्टी उद्योग जीवंत है. हालांकि, कारोबार थोड़ा काम हुआ है, लेकिन कारीगर आज भी जुड़े हुए हैं. करीब इससे 300 परिवारों की आजीविका चल रही है. व्यवसाय कारीगर और फुटकर विक्रेता आदि इससे पैसे कमा रहे हैं.
कई राज्यों से आती है डिमांड
अवधेश वर्मा ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों की मांग खूब रहती है. छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, गुजरात सहित अन्य स्थानों पर इसे ले जाया जाता है, इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थान पर भी इसकी सप्लाई की जाती है. चुनार में तैयार होने वाली मिट्टी के सामान की क्वालिटी आपको कहीं और नहीं मिलेगी. यही वजह है कि यहां पर बनने वाले सामान की खूब मांग रहती है. मूर्तियों से लेकर अन्य सामान तैयार किए जाते हैं. अब बाजार में लोग इसे खूब पसंद भी करते हैं.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…