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झारखंड में बालू संकट अब केवल खनन या सप्लाई की समस्या भर नहीं रह गया है। इसका सीधा असर गरीबों के प्रधानमंत्री आवास, मध्यम वर्ग के निजी गृह निर्माण और रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखने लगा है। बालू की कमी, बढ़ती कीमतों और निर्माण सामग्री के महंगे होने से हजारों लोगों का “अपने घर का सपना” फिलहाल अधर में लटक गया है। स्थिति यह है कि सैकड़ों प्रधानमंत्री आवास अधूरे पड़े हैं, बिल्डरों ने फ्लैटों की निर्माण लागत बढ़ा दी है, जबकि आम लोगों ने अपना घर बनाने का काम अगले सीजन तक के लिए टाल दिया है। 10 जून से बारिश के दौरान एनजीटी (NGT) की रोक लागू होने के बाद हालात और गंभीर होने की आशंका है। बाजार में बालू की भारी कमी और दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर प्रधानमंत्री आवास योजना पर पड़ा है। रांची नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में लाभुकों ने बेस और दीवार तक का काम तो करा लिया है, लेकिन छत ढलाई और फिनिशिंग का काम रुक गया है। रांची, खूंटी, गुमला और सिमडेगा में बड़ी संख्या में लाभुक दूसरी किस्त मिलने के बाद भी मकान पूरा नहीं करा पा रहे हैं। पीएम आवास: लंबित / निर्माणाधीन कार्य की स्थिति दीवार खड़ी, छत अधूरी… 10 जून से लगेगी एनजीटी की रोक, बालू संकट और बढ़ेगा बालू नहीं, इसलिए छत नहीं ढाल पा रहे (केस स्टडी) केस स्टडी-1: सीता देवी, बड़ाम पंचायत, नामकुम: “लिंटेल तक का काम हो गया है, लेकिन बालू नहीं मिल रहा है। जो मिल भी रहा है, उसका रेट बहुत ज्यादा है। इसलिए ढलाई का काम फिलहाल रोक दिया है।” केस स्टडी-2: उमेश नायक, उरगुटू, कांके: “पीएम आवास का काम बालू महंगा होने से रुक गया है। अभी इंतजार कर रहे हैं कि शायद आगे दाम कम हो जाएं।” केस स्टडी-3: सत्यजीत कुमार, मेन रोड: “लॉज का निर्माण शुरू किया था, लेकिन बालू की समस्या के कारण काम टालना पड़ा। अब बारिश के बाद ही आगे का निर्माण कराएंगे।” रांची में 10 हजार फ्लैट निर्माणाधीन क्रेडाई (CREDAI) के एग्जीक्यूटिव मेंबर और झारखंड चैंबर की रियल एस्टेट सब-कमेटी के चेयरमैन अंचल किंगर के अनुसार, रांची में करीब 10 हजार फ्लैट निर्माणाधीन हैं। पहले इन साइट्स पर एक लाख से अधिक मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन अब लगभग 25 हजार मजदूर ही काम कर पा रहे हैं। कई बिल्डरों ने निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे फ्लैट खरीदारों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बालू बिहार से मंगाया जा रहा है, जबकि कुछ स्थानीय स्टॉकिस्ट ऊंचे दामों पर चोरी-छिपे इसकी सप्लाई कर रहे हैं। एक साल में ऐसे बढ़ी निर्माण सामग्री की कीमत राजमिस्त्री और मजदूरों पर भी आजीविका का संकट निर्माण लागत बढ़ने का सीधा असर मजदूरों और राजमिस्त्रियों पर भी पड़ा है। गृह निर्माण ठेकेदार बिशू उरांव बताते हैं कि “मकान मालिक बढ़े हुए रेट पर काम कराने को तैयार नहीं हैं। इसके कारण बाजार में काम कम मिल रहा है और मजदूरों की दैनिक आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई है।” 10 जून के बाद बढ़ेगा बालू का अवैध कारोबार निर्माण कारोबारियों का कहना है कि 10 जून से एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) का प्रतिबंध लागू होने के बाद नदियों से बालू का उठाव लगभग ठप हो जाएगा। ऐसी स्थिति में निजी निर्माण कार्य पूरी तरह रुक जाएंगे, फ्लैट व अन्य प्रोजेक्ट्स की लागत और बढ़ेगी तथा बालू का अवैध कारोबार और अधिक सक्रिय हो सकता है।
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