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अमेरिका-ईरान टकराव के बीच मंगलवार को फिर पेट्रोल 89 पैसे और डीजल के दाम 94 पैसे बढ़ा दिए गए। इससे रांची में एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 101.75 रुपए तो डीजल की 96.70 रुपए हो गई। बीते शुक्रवार को भी दोनों पेट्रो उत्पादों के दाम 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़े थे। फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कच्चे तेल के दाम 50% से ज्यादा बढ़ चुके हैं। इसलिए ताजा कीमत बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 10 तो डीजल पर 13 रु. प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। इसकी बड़ी वजह होर्मुज जलमार्ग का बंद होना है। अधिकारियों का कहना है कि दाम इस तरह बढ़ाए गए हैं ताकि तेल कंपनियों पर दबाव कुछ कम हो। फल-सब्जियां 10 से 15% तक महंगी होने की आशंका पेट्रोल-डीजल अभी और कितना महंगे हो सकते हैं? बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि तेल कंपनियों का नुकसान 50% तक घटाने के लिए कम से 10 रु. तक दाम बढ़ाने जरूरी हैं। यानी आगे 5-6 रु. बढ़ोतरी संभव है। महंगे तेल का जेब पर असर? डीजल सबसे ज्यादा (40%) इस्तेमाल होने वाला ईंधन है। बर्कलेज की रिपोर्ट बताती है कि डीजल महंगा यानी माल ढुलाई महंगी। जून से खुदरा महंगाई दर बढ़ना तय है। इससे फल-सब्जियां 15% महंगे हो सकते हैं। पैकेट बंद दूध, एफएमसीजी प्रोडक्ट्स के दाम भी बढ़ाने की तैयारी है। यहां तेल कीमतों में बढ़ोतरी विकसित देशों से कितनी कम है? विकसित देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन आदि में ईंधन की दरें सीधे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल से जुड़ी हैं। वहां 28 फरवरी के बाद से अब तक पेट्रोल-डीजल 35% से 45% तक महंगे हो चुके हैं। भारत में अभी दाम 4% ही बढ़े हैं। तेल कंपनियों को अभी कितना नुकसान हो रहा? दो बार में 4 रु. बढ़ने से तेल कंपनियों का घाटा 25% कम हुआ है। उन्हें अभी भी रोज 750 करोड़ रु. का नुकसान हो रहा है। मंदिर के सोने पर स्कीम की खबरें गलत इस बीच, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मंदिरों के पास मौजूद सोने को मोनेटाइज करने या किसी प्रस्तावित गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत इस्तेमाल करने की बात पूरी तरह गलत है और भ्रामक है। ऐसी खबरें या सोशल मीडिया पोस्ट बेबुनियाद हैं।
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