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- An Initiative To Empower 65,000 Women Farmers Across 19 Districts Of The State To Become Self reliant. They Will Be Linked To Climate friendly Horticulture.
रांची1 दिन पहले
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ग्रामीण क्षेत्रों की महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने 748 करोड़ रुपए की जलवायु अनुकूल बागवानी उद्यमिता परियोजना तैयार की है। ‘झारखंड की महिला समूहों द्वारा जलवायु अनुकूल बागवानी उद्यमिता परियोजना’ को गुरुवार को विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने सशर्त सहमति दे दी।
समिति ने ग्रामीण विकास विभाग से कहा है कि बजट प्रावधान और विदेशी ऋण पर ब्याज दर के संबंध में वित्त विभाग से भी सहमति ली जाए। इसके बाद विभाग आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सरकार अनुपूरक बजट में राशि का प्रावधान करेगी। वित्त विभाग की सहमति के बाद ही योजना शुरू होगी। -शेष पेज 11 पर
पहले चरण में 31 हजार किसानों को मिला लाभ
परियोजना की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। इसे वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक राज्य के नौ जिलों के 30 प्रखंडों में लागू किया गया। पहले चरण में 31,819 किसानों को माइक्रो ड्रिप सिंचाई प्रणाली से जोड़ा गया। प्रति किसान की वार्षिक आय में औसतन 22 हजार रुपए की वृद्धि दर्ज की गई। परियोजना के तहत 300 कृषि यंत्र बैंक, 14 बहुउद्देश्यीय सामुदायिक केंद्र और पांच मीट्रिक टन क्षमता वाले 10 कोल्ड चैंबर बनाए गए। अब दूसरे चरण में परियोजना का विस्तार 19 जिलों के 65 प्रखंडों तक किया जाएगा।
साल में 2-3 फसल लेने की ट्रेनिंग
परियोजना का उद्देश्य महिला किसानों की आय बढ़ाना और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है। उन्हें बहुफसली खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। 25 डिसमिल मॉडल के तहत किसानों को एक फसल के बजाय साल में दो से तीन फसल लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।
जानिए…किन महिलाओं को लाभ
आवेदक महिला का सखी मंडल की सदस्य होना अनिवार्य होगा।
लाभुक के पास योजना के अनुरूप कम से कम 25 डिसमिल भूमि होनी चाहिए।
गरीब परिवारों तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी। किसानों को योजना के अनुसार निर्धारित अंशदान देना होगा।
65 हजार महिला किसानों को लाभ देने का लक्ष्य… परियोजना के दूसरे चरण में 19 जिलों के 65 प्रखंडों की 65 हजार महिला किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना आठ वर्षों तक चलेगी। प्रखंडों का चयन स्थानीय संसाधनों, उत्पादन क्षमता, बाजार तक पहुंच और सखी मंडलों की सक्रियता के आधार पर किया गया है।
