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Russias Secretly Gives NEBO UN Radar to India: भारत ने सीक्रेट तरीके से रूस से नेबो यूएम वीएचएफ रडार लिया है. यह दुनिया का सबसे एडवांस रडार सिस्टम है. यह पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को भी डिटेक्ट कर सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि भारत ने चीन के जे-20 और जे-35 फिफ्थ जेन जेट को काउंटर करने के लिए यह कदम उठाया है. अब इस रडार से भारत पांचवीं पीढ़ी के जेट को भी करीब 250 दूर से ही डिटेक्ट कर सकेगा. इससे भारत के पास अपने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव करने का समय मिला जाएगा. फिर काफी हद तक इसके खतरों से निपटा जा सकेगा.
भारत ने सीक्रेट तरीके से रूस से NEBO UN Radar खरीदा है.
Russias Secretly Gives NEBO UN Radar to India: भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. यह भी सही है कि हम चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से घिरे हुए हैं. लेकिन, इसका कतई मतलब नहीं है कि भारत ने अपनी सुरक्षा चुनौतियों से किसी तरह का कोई समझौता कर लिया है. लड़ाकू विमानों की खरीद एक जटिल प्रक्रिया है. इसमें कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं. इस कारण भारत इस वक्त इसको लेकर थोड़ी मुश्किल का सामना कर रहा है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि लड़ाकू विमान के मामले में अभी वक्त भारत का साथ नहीं दे रहा है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि भारत लड़ाकू विमान की कमी के बहाने अपनी सुरक्षा तैयारियों में नहीं जुटा है.
सुरक्षा मामलों के जानकार बताते हैं कि इस वक्त चीन और पाकिस्तान बेहद आक्रामक तरीके से अपने एयरफोर्स के मॉडर्नाइजेशन में लगे हैं. चीनी एयरफोर्स के बेड़े में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट जे-20 शामिल हो चुके हैं. वह एक दूसरे पांचवीं पीढ़ी के जेट जे-35 का प्रोडक्शन शुरू कर चुका है. इतना ही नहीं वह अपने जे-20 फिफ्थ जेन फाइटर जेट पाकिस्तान को भी देने जा रहा है. दूसरी तरफ भारत इस वक्त चौथी और 4.5 पीढ़ी के जेट पर टिका है. इस पीढ़ी के जेट की भी ही पर्याप्त संख्या में सप्लाई नहीं हो पा रही है. पांचवीं पीढ़ी की बात अभी काफी दूर है.
यह समय पारंपरिक जंग का नहीं
इस परिस्थिति में आपको लगता होगा कि भारत कहीं न कहीं अपनी सुरक्षा चुनौतियों से समझौता कर रहा है. लेकिन, आप गलत हैं. ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन जंग में दुनिया के दिखा दिया है कि यह समय पारंपरिक जंग का नहीं है. भारत ने बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसी तरीके का प्रदर्शन किया था. भारत की इसी रणनीति के कारण मात्र 72 घंटे के भीतर पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए थे. हम आज इसको लेकर डिटेल में नहीं जा रहे हैं. बल्कि हमारा फोकस कुछ और है.
दरअसल, हमारे पुराने मित्र रूस ने भारत को अपना एक सीक्रेट वेपन सौंप दिया है. यह वेपन है नेबो-यूएम वीएचएफ रडार (Nebo-UM Radar) है. अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या बड़ी बात है. यह तो एक रडार सिस्टम ही है. लेकिन, नहीं. यह दुनिया का अब तक का सबसे एडवांस रडार सिस्टम है जो पांचवीं पीढ़ी स्टेल्थ कहे जाने वाले फाइटर जेट्स को भी डिटेक्ट कर लेता है. रूस ने यही रडार भारत को थमा दिया है. तो अब आप समझ ही गए कि यह हथियार इतना खास क्यों है.
हाल ही में वायु शक्ति-2026 अभ्यास के दौरान इस रडार सिस्टम को प्रदर्शित किया गया. लेकिन, इसके बारे में ओपन सोर्स में और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. बस इतना पता चला है कि यह Nebo-UM Radar सिस्टम है. भारत ने इसके कितने यूनिट खरीदे हैं. यह डील कितने की है. इसकी कहां तैनाती की गई है. इसे कब खरीदा गया… जैसे तमाम सवाल हैं. लेकिन, ये सभी बातें सीक्रेट हैं. भारत सरकार और एयरफोर्स दोनों ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. यानी इस वेपन के बारे में हर एक चीज सीक्रेट रखा गया है.
चीन ने अपने बेड़े में पांचवीं पीढ़ी के जे-20 जेट्स शामिल कर चुका है.
नेबो-यूएम वीएचएफ रडार की खासियत
नेबो-यूएम वीएचएफ रडार की खासियत ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यह अपने टार्गेट का 3डी इमैज बनाता है. यह पारंपरिक हाई फ्रीक्वेंसी रडार जैसे एक्स-बैंड और केयू बैंड से बिल्कुल अलग है. बल्कि नेबो-यूएम वीएचएफ रडार वीएचएफ यानी वेरी हाई फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम पर काम करता है. इसका रेंज 133-144 मेगा हर्ट्ज से लेकर 216-225 मेगा हर्ट्ज होता है. इस रडार से निकलने वाली रेडियो तरंगें स्टेल्थ विमानों की बाहरी संरचना के साथ अलग तरीके प्रतिक्रिया देती है. इससे स्टेल्थ तकनीक का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है और फिर ये जेट रडार पर दिखने लगते हैं. अभी तक ये स्टेल्थ जेट अपने ढांचे पर लगे खास पेंट की वजह से पारंपरिक रडार से निकलने वाली तरंगों को सोख लेते हैं.
निशाने पर चीनी स्टेल्थ जेट
रूसी सुखोई-57 फाइटर जेट.
एसयू-57 के लिए खुलेंगे दरवाजे
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें